ई-उप रजिस्ट्रार कार्यालय में करोड़ो का भ्रष्टाचार

सब-रजिस्ट्रार सी.पी.पांडे, रिडर अत्तर सिंह और दिल्ली पुलिस के सिपाही वीरेंद्र सिंह से मिलीभगत कर बुजुर्ग शिक्षक वी.पी.भाटिया व उनकी पत्नी मोहिंदर भाटिया के पफर्जी कागजात बनाकर कराई प्लाट की रजिस्ट्री
नई दिल्ली । ;कार्यालय संवाददाताद्ध बाहरी दिल्लीः रोहिणी की समाजिक संस्था अपराध् एवं भ्रष्टाचार निरोध्क मोर्चा ने संवाददाता को बताया कि ई-उप रजिस्ट्रार कार्यालय में करोड़ो के भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार सी.पी. पांडे, रिडर अत्तर सिंह कई वर्षो से रजिस्ट्री, जीपीए व किसी और को खड़ा कर पफोटो खेंचने व अन्य स्टाम्प पेपर/कागजातो में हेरा पफेरी व पफर्जीवाड़ा सरेआम कर रहे है। लेकिन मंडल आयुक्त से लेकर उपायुक्त, उत्तरी-पश्चिमी जिला, राजस्व विभाग आंखे मूंदे बेठे है और आंखे मूंदे भी क्यो ना क्योकि मोतिया बिंद भ्रष्टाचार का चश्मा इनकी आंखो पर चढ़ा हुआ है, इनको यह दिखाई नही देता कि इनके ई उप-रजिस्ट्रार कार्यालय रोहिणी में कैसे कैसे कारनामे हो रहे जैसे कि आधर कार्ड, पैन कार्ड, पफोटो, स्टेम्प पेपरों में हेरापफेरी पफर्जीवाड़ा करके करोड़ो रूपये का सरकार को चूना लगाया जा रहा है। एक करोड़ की प्रोपट्र्री को रजिस्ट्रार और रिडर अपने कमिशन अनुसार कम करके लाखों में दिखाकर कागज बना देते है। जिससे सब-रजिस्ट्रार सी.पी.पांडे, रिडर अत्तर सिंह और दलालो का समाजवाद दूर हो रहा है। ऐसा ही एक मामला रोहिणी क्षेत्रा के बुजुर्ग दंपती के प्लाट का पफर्जीवाड़ा कर रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। इस बाबत केएन काटजू मार्ग थाने में धेखाध्ड़ी, आपराध्कि साजिश रचने, पफर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने आदि धराओं में मामला दर्ज कर दिल्ली पुलिस के सिपाही वीरेंद्र सिंह को गिरफ्रतार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार रिटायर्ड शिक्षक वीपी भाटिया व उनकी पत्नी मोहिंदर भटिया गुजरात के सूरत के निवासी है। दिल्ली विकास प्राध्किरण ;डीडीएद्ध की आवासीय योजना के तहत रोहिणी सेक्टर-11 में दंपती के नाम पर प्लाट आवंटित हुआ था। अब दंपती दिल्ली में रहने के लिए घर बनाना चाहते थे। दर्ज एपफआईआर के अनुसार दंपती ने घर बनवाने के लिए इलाके के ही एक बिल्डर से जनवरी में करार किया था। ऐसे में बिल्डर ने उस प्लाट पर घर बनाने का काम शुरू किया, लेकिन दो मार्च को पीसीआर में तैनात सिपाही वीरेंद्र सिंह व सात-आठ अन्य लोग प्लाट पर पहुंचे और उन्होंने बिल्डर व काम कर रहे मजदूरों को काम करने से रोक दिया और ध्मकी देकर चले जाने को कहा। आरोपित सिपाही ने कहा कि उसने प्लाट की रजिस्ट्री कराई है। सिपाही व उसके साथियों की ध्मकी के बाद बिल्डर व मजदूर वहां से चले गए और मुख्य भूमिका सामने आई सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में कार्यरत अध्किारी सी.पी.पांडे और रिडर अत्तर सिंह की जब इसकी जानकारी बुजुर्ग दंपती को हुई तो उन्होने दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग की वेबसाइट पर जाकर जांच पड़ताल की तो उन्हें पफर्जीवाड़े का पता चला। उन्हे पता चला कि उनके नाम से पफर्जी आधर व पैन कार्ड आदि बनवाकर 11 पफरवरी को प्लाट को आरोपित के नाम से रजिस्ट्री के समय पीड़ित दंपती की जगह किसी और को खड़ा कर दिया गया। दंपती का आरोप है कि करोड़ों के प्लाट को हड़पने का खेल बगैर सब रजिस्ट्रार की मिलीभगत से नही हो सकता है। कार्यालय संवाददाता को अपराध् एवं भ्रष्टाचार निरोध्क मोर्चा को यह भी बताया कि यह तो केवल एक मामला है ना जाने ऐसे कितने मामले रोहिणी सब-रजिस्ट्रार में मिलेंगे जिनकी जांच होनी चाहिए। शेष अगले अंक में…….

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