राजनैतिकशिक्षा

घातक जहरीली हवा के कुप्रभाव

-वैद्य अरविन्द प्रेमचंद जैन-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

हमारी सृष्टि पंचमहाभूतात्मक हैं जिसमे पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि आकाश होते हैं। मनुष्य के अलावा वृक्ष, नदियां, जंगल, सभी इन पंच महाभूतों से बने हैं।इन सब पर अति व्यवहार करने से, कम व्यवहार करने से और मिथ्या व्यवहार करने से प्रकृति का संतुलन बिगड़ता हैं, और असंतुलन ही विकृति का मूल कारण हैं। इसमें जो वस्तुए निर्जीव हैं और जो जीव हैं प्रदुषण का प्रभाव पड़ता हैं। मनुष्य और पशु, पक्षी मानसिक रूप से भी प्रभावित होते हैं। मनुष्य में विवेक और मन होने से प्रदुषण से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, और मूल रूप से मनुष्यों द्वारा इस प्रदुषण को बढ़ाने में पूरा योगदान रहता है। कारण मनुष्यों के द्वारा ही वाहनों के उपयोग में पेट्रोल, डीजल का उपयोग करना, पृथ्वी की छाती पर दिन रात नए भवनों, वाहनों द्वारा नित्य दोहन हो रहा हैं, वही फैक्ट्रियों द्वारा वायु प्रदुषण और जल प्रदुषण किया जा रहा हैं, अब तो आकाश भी सुरक्षित नहीं हैं।

जैसे जानवर पशु पक्षी पेड़ पौधे नदियां अपनी प्रकति नहीं छोड़ती यानी शाकाहारी जानवर मांसाहारी नहीं होते।, मांसाहारी कभी शाकाहारी नहीं होते पर मानव एक ऐसा जानवर हैं जिससे मांसाहार, शाकाहार, नदियां, जंगल आदि सुरक्षित नहीं हैं, यह प्रदुषण मानव की कुंठा को प्रदर्शित करती हैं। कारण मानव ही प्रकति का बेमुरब्बत दोहन करता हैं, किया हैं और करेगा। आज प्रदुषण का प्रभाव जन्मजात शिशुओं, वयस्कों से लेकर वृद्धों तक प्रभावित हो रहे हैं। आज आवश्यकता हैं बचाव की। वायु प्रदूषण का बच्चों के फेफड़ों पर बहुत बुरा असर पड़ता है और इसकी वजह से उन्हें अस्थमा तक हो सकता है।

भारत के मेट्रो शहरों की हवा इतनी प्रदूषित होती जा रही है कि यहां सांस लेना दूभर हो रहा है। वयस्कों का शरीर तो फिर भी प्रदूषण भरी हवा को किसी तरह झेल रहा है लेकिन बच्चों और बूढ़ों का प्रदूषण में बुरा हाल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में 15 साल से कम उम्र के 93 फीसदी बच्चे प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं जिसकी वजह से उन्हें कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं घेर रही हैं।
गंदी हवा में सांस लेने का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर ही पड़ता है, इसलिए आज प्रदूषित हवा में सांस लेने से बच्चों के फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है और किस तरह बच्चों को इस दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं।जहरीली हवा गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचाती है। गर्भ में प्रदूषित हवा की वजह से शिशु के फेफड़ों का विकास प्रभावित हो सकता है।यदि बच्चा प्रदूषित हवा के बहुत ज्यादा संपर्क में रहे तो इसकी वजह से प्रीमैच्योर बर्थ और लो बर्थ वेट की दिक्कत हो सकती है। प्रेगनेंट महिलाएं पूरी तरह से वायु प्रदूषण को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं, लेकिन वो अपने आसपास की हवा को साफ करने के लिए कुछ असरकारी तरीके जरूर आजमा सकती हैं।
वयस्कों की तुलना में बच्चों को प्रदूषित हवा में सांस लेने का ज्यादा नुकसान होता है। बच्चों का श्वसन मार्ग छोटा और विकसित हो रहा होता है। उनके फेफड़े वयस्कों से ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं। यदि बच्चा लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस ले तो उसे निम्न नुकसान हो सकते हैं:जब बच्चों का विकास हो रहा होता है उस समय जहरीली हवा के कारण उनके फेफड़े ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। बड़े होकर या बचपन में अस्थमा घेर सकता है। पहले से ही अस्थमा हो तो स्थिति और बदतर हो सकती है। घरघराहट, खांसी, बड़े होने पर लंग कैंसर का खतरा और निमोनिया जैसे इंफेक्शन का जोखिम।
वायु प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है और आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आप अपने शहर में रह कर भी इस पॉल्यूशन से बचने के कुछ तरीके अपना सकते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से बच्चों को कुछ हद तक वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसानों से बचा सकते हैं।
संभव हो तो नजदीक जगहों पर जाने के लिए कार या स्कूटर की बजाय पैदल चलें। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर प्रदूषण ज्यादा होता है।
अपने घर में एयर प्यूरीफायर लगाकर घर की हवा को साफ कर सकते हैं।
घर में रसायनों का इस्तेमाल कम से कम होना चाहिए।
इस तरह आप अपने बच्चों को कुछ हद तक वायु प्रदूषण से दूर रखकर कई स्वास्थ्य समस्याओं से दूर रख सकते हैं। ये आपके बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
वायु प्रदूषण से सांस संबंधी रोग होते हैं, यह सभी को पता है लेकिन यूनिसेफ की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण बच्चों के दिमाग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। देश के अधिकांश शहर गंभीर रूप से प्रदूषण से जूझ रहे हैं। और फेफड़े विकसित होने की प्रक्रिया में होते हैं। ऐसे में हर बार सांस लेते वक्त अपने शरीर के वजन के मुताबिक बच्चे, बड़ों की तुलना में ज्यादा हवा अंदर लेते हैं। अगर हवा जहरीली है तो बच्चे बड़ों की तुलना में ज्यादा प्रदूषित हवा अपने शरीर के अंदर लेते हैं।प्रूदषण के कण इतने छोटे और बारीक होते हैं कि वे हवा के जरिए बच्चों के शरीर के अंदर पहुंचते हैं और फिर खून से होते हुए ब्रेन तक पहुंच जाते हैं और ब्लड ब्रेन बैरियर को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे न्यूरो-इन्फ्लेमेशन की समस्या हो सकती है।
प्रदूषण के कुछ कण इतने बारीक होते हैं जैसे- अल्ट्रा फाइन मैग्नेटाइट, जो अगर शरीर में पहुंच जाएं तो ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस हो सकता है जो आगे चलकर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का कारण बनता है।
दूसरे तरह के प्रदूषण के कण जैसे- पॉलिसाइक्लिक ऐरॉमैटिक हाइड्रोकार्बन, मस्तिष्क के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं जो न्यूरॉन्स को कम्यूनिकेट करने में मदद करता है। साथ ही मस्तिष्क के उस हिस्से को भी प्रभावित करता है जिसके जरिए बच्चा सीखता है और विकसित होता है।
बच्चों के मस्तिष्क पर जहरीली हवा का असर इसलिए भी ज्यादा होता है क्योंकि बड़ो की तुलना में बच्चों के दिमाग को जहरीले केमिकल्स का छोटा सा हिस्सा भी नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही बच्चे, बड़ों की तुलना में ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं इसलिए भी ज्यादा प्रदूषित हवा को शरीर के अंदर ले लेते हैं।
बच्चों की सेहत के लिए इस समय खतरा काफी बढ़ गया है। एक तरफ कोरोना वायरस है तो दूसरी तरफ वायु प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है।
इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस की मार झेल रही है शहरों में रह रहे लोग वायु प्रदूषण से भी परेशान हैं। हम सभी जानते हैं कि वायु प्रदूषण की वजह से हवा कितनी खराब हो चुकी है और इस हवा में सांस लेने से वयस्कों और बुजुर्गों की सेहत तो बिगड़ ही रही है लेकिन छोटे बच्चों की नाजुक सी इम्यूनिटी भी छटपटा रही है।प्रदूषण से भरी हवा में सांस लेने पर हर बच्चे की मां टेंशन में आ गई है। एक तरफ कोरोना वायरस तो दूसरी तरफ वायु प्रदूषण नजर गड़ाए बैठा है।
बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए ये समय बहुत महत्वपूर्ण है ताकि उनका अपना शरीर इन खतरों से खुद को बचा पाए। बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत कर उन्हें कोरोना और एयर पॉल्यूशन से लड़ने के लिए तैयार किया जा सकता है।

विटामिन सी

कोरोना से लड़ने के लिए विटामिन सी बहुत जरूरी है इसलिए अपने बच्चे की डाइट में पर्याप्त विटामिन सी रखें। संतरे, टमाटर और नींबू के रस आदि से बच्चों को काफी मात्रा में विटामिन सी मिल सकता है।

च्यवनप्राश

बच्चों को रोज एक चम्मच च्यवनप्राश खिलाएं। च्यवनप्राश को कई जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने का काम करती हैं। सर्दी के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां खूब आती हैं। इसे बच्चे के आहार में शामिल करें।

हरी सब्जियां

बच्चों को हरी सब्जियों से आयरन के साथ-साथ कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं। ये तो कहने की जरूरत नहीं है कि बच्चे को दिन में दो बार दूध पिलाना है। लेकिन इस दूध में केसर, तुलसी की पत्तियां या कच्ची हल्दी मिला सकती हैं। तुलसी और हल्दी इम्यूनिटी को बढ़ाने का काम करती हैं।

अदरक

अगर बच्चा अदरक खा लेता है तो उसके खाने में अदरक के बारीक टुकड़े काटकर डालें। वायु प्रदूषण से बचने के लिए घर में एयर प्यूरीफायर भी लगा सकते हैं। इससे घर की हवा शुद्ध होती है और बच्चा साफ हवा में सांस ले पाता है।

भविष्य प्रदुषण के कारण सुरक्षित नहीं हैं और न रहेगा। जब बचव के साधन नहीं होंगे और उसके अलावा बचाव के साधन न रहेंगे या वे प्रदूषित रहेंगे तब अकाल के गाल में समाना ही एक मात्र विकल्प होगा। अभी हम कगार पर खड़े हैं उसके आगे बढने पर मौत को निमंत्रण देना होगा। अंधाधुंध उपयोग करने से ही प्रकति में असंतुलन होता हैं। इसको सीमित और हानिरहित उपयोग करना होगा।

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