विश्लेषणः जनमानस के अंतर्मन की आवाज- मोदी है तो मुमकिन है !

उपलब्धियों से भरे मोदी सरकार के सात साल

-दीपक प्रकाश-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

मोदी है तो मुमकिन है- यह वाक्य भारत के आम जनमानस के अंतर्मन की आवाज बन चुका है। भारत जैसे विविधताओं से भरे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में नेतृत्व पर इतना भरोसा, विश्वास व समर्थन असंभव-सा प्रतीत होता है। परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कुशल व साहसिक नेतृत्व परिश्रम, सक्रियता, समर्पण एवं संकल्पबद्धता से इस भरोसे को प्राप्त किया है। उनके नेतृत्व में भारत सामरिक एवं आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। राष्ट्र के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों एवं संकटों से निपटने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसिक नेतृत्व का लोहा दुनिया मानती है। लंबे समय से चली आ रही समस्याये हों, जटिल से जटिल मुद्दा हो, अचानक उत्पन्न संकट हो या फिर वैश्विक महामारी कोरोना ही क्यों न हों, इन सभी समस्याओं के समाधान की दिशा में उनकी सकारात्मकता एवं प्रतिबद्धता अद्भुत और अनुकरणीय है। आज 30 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दो पूरे कर लिए। वर्ष 2014 से अबतक के उनके 7 वर्षों का कार्यकाल सशक्त, समर्थ और आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास को दर्शाता है।

नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में विकास की स्वर्णिम यात्रा जारी है। उन्होंने अपने दृढ इच्छाशक्ति के बल पर असंभव प्रतीत होने वाली समस्याओं का समाधान कर राष्ट्रीयता की विजय गाथा लिखी है। धारा 370, नागरिकता संशोधन, तीन तलाक पर कानून, श्रीराम मंदिर निर्माण, बोडो समझौता जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय भावनाओं के अनुरूप समाधान किया है। वर्ष 2014 में सता संभालने के बाद उन्होंने विरासत में मिले यूपीए शासनकाल के भ्रष्टाचार, अराजकता, पॉलिसी पैरालिसिस, कुशासन, जर्जर आर्थिक स्थिति एवं महंगाई से देश को बाहर निकाला है। अपने साहसिक नेतृत्व से भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार किए। शासन-प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त कर नई कार्य संस्कृति विकसित की। गरीब कल्याण आधारित अभिनव योजनायें शुरू की, सही समय पर राष्ट्रहित में कठोर और कड़े निर्णय लिए। परिणामस्वरूप भारत एवं भारतवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हुए। आज प्रगति के पथ पर भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। जनधन योजना, मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं आयुष्मान योजना के माध्यम से अंत्योदय के उद्देश्य को पूरा किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल के बीते दो वर्ष भी कोविड जैसी महामारी के बावजूद उपलब्धिपूर्ण रहे। एक ओर महामारी से निपटना दूसरी ओर अर्थव्यवस्था की मजबूती को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। इन सब चुनौतियों के बीच सरकार ने धारा 370 को समाप्त करने का साहसिक कार्य कर भारत की एकता व अखंडता को मजबूती प्रदान की। देश की सुरक्षा को मजबूती प्रदान की। चीन व पाकिस्तान जैसे देशों के मंसूबे पर करारा प्रहार किया। राममंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई। तीन तलाक से महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तनों को लाते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई। किसानों को सशक्त बनाने, उनकी आय दोगुनी करने तथा उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तथा अपनी उपज को कहीं भी बेचने की स्वतंत्रता देने के लिए कृषि कानून लाकर प्रधानमंत्री ने अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का कार्य किया है।

बीते वर्ष वैश्विक कोरोना महामारी ने चीन, स्पेन, इटली, अमेरिका जैसे देशों में कहर मचा रखी थी। वैसे में प्रधानमंत्री ने स्थिति का सही व सटीक विश्लेषण कर उचित समय पर जनता कर्फ्यू एवं लॉकडाउन की घोषणा कर कोविड संक्रमण के प्रसार को रोका तथा महामारी की रोकथाम की दिशा में कदम उठाये। अचानक पैदा हुई स्वास्थ्य उपकरणों की जरूरतों, पीपीई किट, टेस्टिंग किट्स, मास्क, ऑक्सीजन सिलिंडर वेंटिलेटर आदि की उपलब्धता बढ़ाई। इस दौरान मोदी सरकार ने 2.76 लाख करोड़ के गरीब कल्याण योजना की घोषणा की जिसके तहत देश के 80 करोड़ लोगों को पूरे कोविड काल में अनाज व दाल मुफ्त में दिया गया। 8 करोड़ परिवारों को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराये गये। वहीं, 20 करोड़ महिला जनधन खाता धारकों के खाते में आर्थिक सहायता की किस्तें दी गई। दिव्यांगों, विधवाओं एवं बुजुर्गों को भी सहायता राशि दी गई। किसानों को सम्मान निधि योजना की भी किस्तें दी गई। प्रवासी मजदूरों के रोजगार के लिए ष्प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना शुरू की गई। इस वर्ष भी केन्द्र सरकार व डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि दी जा रही है।

आप कल्पना कीजिए यदि जनधन योजना के तहत प्रधानमंत्री ने खाते नहीं खुलवाये होते तब उन तक सहायता राशि कैसे पहुंचती। क्या स्थिति होती। आप कल्पना कीजिए यदि उज्जवला योजना के तहत गैस सिलिंडर का वितरण नहीं हुआ होता तो महिलाओं को कोरोना काल में जलावन के लिए घर से निकलना पड़ता आप कल्पना कीजिए यदि शौचालय का निर्माण नहीं हुआ होता तो कोरोना संक्रमण का प्रसार कितना भयावह होता। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शितापूर्ण नेतृत्व के कारण ही देश के गरीब, मजदूर, किसान, युवा, बुजुर्ग, महिलाओं को सीधे सहायता मिल पा रही है।

कोविड महामारी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को बचाने की दिशा प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के मंत्र पर देश की जनता कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल की भावना देश में बढ़ी है। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में देश के वैज्ञानिकों, चिकित्सा क्षेत्र के बड़े-बड़े विशेषज्ञों ने भारत में दो-दो वैक्सीन बनाने में कामयाबी हासिल कर मेडिकल फील्ड में भारत की प्रतिष्ठा को स्थापित किया है। आज पूर्ण देश से विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। भारत की कोविड वैक्सीन की मांग लगातार बढ़ रही है। महामारी के खिलाफ जारी निर्णायक लड़ाई में पूरा विश्व जहाँ मोदी जी की क्षमता की प्रशंसा कर रहा है, भारत का आम नागरिक महामारी के खिलाफ जंग में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है, स्वदेशी वैक्सीनेशन कार्यक्रम में भाग ले रहा है।

वहीं, दूसरी ओर इस कठिन दौर में कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों का आचरण और व्यवहार बेहद निराशाजनक एवं असंवेदनशील रहा है। विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा इस दौरान भय और हताशा पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। जीवन रक्षक कोरोना वैक्सीन की बर्बादी की जा रही है। विपक्ष टूलकिट के माध्यम से लाशों की राजनीति कर रहा है। वैक्सीनेशन के प्रति दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं को मरीजों तक पहुँचाने की राह में बाधा लाने की कोशिशें हुई, कोरोना योद्धाओं का अपमान सहित केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए स्वास्थ्य उपकरणों, दवाओं और वैक्सीन का सही उपयोग नहीं किया गया।

विपक्ष द्वारा भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने की कोशिशें की जा रही है। परंतु देश प्रधानमंत्री के भरोसेमंद नेतृत्व में उनके साथ मजबूती से खड़ा है। देश का जनमानस चतुर्दिक विकास के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हो रहे कार्यों से पूर्णतः संतुष्ट है तथा संकटों से निर्णायक युद्ध करने की प्रधानमंत्री की क्षमता पर पूर्ण भरोसा करता है।

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