राजनैतिकशिक्षा

बजट में मध्यम वर्ग की उपेक्षा

-डॉ. वरिंदर भाटिया-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

बजट 2021 में इनकम टैक्स में छूट मिलने की उम्मीदें लगाए बैठी मिडिल क्लास को करारा झटका लगा है और इस बजट से सैलरीड और मिडिल क्लास ज्यादा खुश नहीं हैं। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट में न तो कोई इनकम टैक्स में अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया गया। टैक्सपेयर्स को पहले की तरह ही टैक्स नियमों का पालन करना होगा। सिर्फ 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को रिटर्न फाइल करने से राहत मिली है। 75 साल से अधिक की आयु वाले बुजुर्गों को अब इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरना होगा, जो सिर्फ पेंशन पर आश्रित हैं। हालांकि, एनआरआई टैक्सपेयर्स को डबल टैक्सेशन में थोड़ी राहत दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स असेसमेंट की अवधि को घटा कर छह साल से तीन साल किया गया है। इसका मतलब है कि अब तीन साल से पुराने केस नहीं खोले जाएंगे। टैक्स सुधार की दिशा में यह बड़ा कदम है। यानी 50 लाख से कम आय के कर चोरी मामलों में पुराने रिटर्न खोलने की समय सीमा को 6 साल से घटाकर 3 साल किया गया है। इसके साथ ही 50 लाख से अधिक टैक्स चोरी के सबूत सामने आने पर ही 10 साल पुराने रिटर्न खोले जा सकेंगे। इसके लिए भी प्रमुख आयकर आयुक्त की अनुमति जरूरी होगी। लोगों को पिछले साल की ही तरह आपको इस साल भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दो ऑप्शन मिलेंगे। साथ ही डिविडेंड से मिलने वाली आय पर एडवांस टैक्स नहीं जमा करना होगा। इसके अलावा 45 लाख रुपए तक का घर खरीदने पर 1.5 लाख रुपए तक के ब्याज पर अतिरिक्त छूट जारी रखी है और 31 मार्च 2022 तक इस टैक्स से छूट मिलती रहेगी।

टैक्स से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार की तैयारी फेसलेस असेसमेंट और अपील के बाद अब अपीलेट ट्रिब्यूनल को भी फेसलेस बनाने की तैयारी की है। सरकार ने फेसलेस इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल सेंटर बनाने की घोषणा की है। इसके तहत सभी कम्युनिकेशन अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होंगे। वहीं, अगर इन-पर्सन सुनवाई की जरूरत पड़ी तो यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा। इस बजट से कॉरपोरेट जगत खुश है, शेयर बाजार बमबम है, लेकिन मध्यम वर्ग को कुछ खास नहीं मिला है। कई साल से यह मांग की जा रही थी कि बेसिक टैक्स छूट सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर देनी चाहिए। सरकार ने साल 2019-20 के बजट में 2.5 से 5 लाख रुपए तक की आय वालों के लिए 12500 की विशेष छूट देकर 5 लाख तक की आय को करमुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन स्थायी रूप से 5 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त करने की मांग की जा रही थी। लेकिन इस पर वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया। एक और मांग यह की जा रही थी कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाया जाए। अभी तक ऐसा डिडक्शन 50 हजार रुपए तक का मिलता है। इसे बढ़ाकर कम से कम 75000 रुपए करने की मांग की जा रही थी। जानकारों का कहना है कि कोरोना संकट की वजह से लोगों ने काफी मुश्किलों का सामना किया है। महंगाई की वजह से इलाज के खर्चे काफी बढ़ गए हैं और वर्क फ्रॉम होम करने की वजह से नौकरीपेशा लोगों का बिजली और अन्य यूटिलिटी पर खर्च काफी बढ़ गया है। लेकिन इस पर भी कुछ नहीं किया गया। इसी तरह आयकर की धारा 80-सी के तहत मिलने वाली छूट को बढ़ाकर 1.5 से 3 लाख रुपए तक करने की मांग की जा रही थी, लेकिन इसमें भी कुछ नहीं हुआ।

मिडिल क्लास उम्मीद लगाए बैठा था कि कोरोना महामारी के दौरान बढ़े स्वास्थ्य खर्चों को मद्देनजर रखते हुए सरकार की ओर से कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर हॉस्पिटलाइजेशन से जुड़े खर्चों पर टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में इसे लेकर भी कोई घोषणा नहीं की गई। टैक्स के नियम 80डीडीबी में कोरोना महामारी को शामिल नहीं किया गया। टैक्स नियमों के अनुसार न्यूरो संबंधित बीमारी, कैंसर, एड्स समेत कई बीमारियों के लिए सेक्शन 80डीडीबी के तहत सालाना 40 हजार रुपए तक का टैक्स डिडक्शन लाभ मिलता है। इस नियम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा एक लाख रुपए है। पेट्रोल की कीमतों में 2.50 और डीजल की कीमतों में 4 रुपए कृषि सेस लगाया गया है। सरकार ने कहा है कि इसका असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। यह सेस कंपनियों को चुकाना होगा। लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आगे चलकर कंपनियों की मनमानी की वजह से उपभोक्ताओं को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। नए घर खरीदने पर छूट की उम्मीद सरकार से की जा रही थी, इसे लेकर कोई घोषणा नहीं हुई। कोरोना महामारी के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस एक बड़ी जरूरत के तौर पर सामने आया है। ऐसे में माना जा रहा था कि सरकार की ओर से हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर छूट की घोषणा की जा सकती है, लेकिन वित्त मंत्री ने ऐसा कुछ नहीं किया। टैक्स नियमों के अनुसार सेक्शन 80डी के मुताबिक 50 हजार रुपए तक का प्रीमियम टैक्स फ्री है। बजट में मोबाइल फोन और चार्जर महंगे कर दिए गए हैं। आज के समय में किसी भी शख्स की सबसे बेसिक जरूरत की चीज मोबाइल है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चमड़े के जूते व सामान्य जूते, आयातित ऑटो पार्ट्स, सिल्क से जुड़े उत्पाद, आयातित रत्न (कीमती पत्थर) आदि महंगे हुए हैं। प्रोविडेंट फंड में सालाना 2.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा करने वालों को उस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा।

डिविडेंड से होने वाली इनकम पर एडवांस टैक्स नहीं देना है। डिविडेंड की रकम इन्वेस्टर्स को मिलने के बाद ये टैक्स भरना होगा। केंद्रीय बजट 2021 मुख्य रूप से किसान, वैक्सीन और चुनाव को समर्पित है। हालांकि बजट को टकटकी बांधे देख रहे मिडिल क्लास को निराशा हाथ लगी है। पिछले साल की ही तरह लोगों को इस बार भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दो विकल्प मिलेंगे। कोरोना काल में नौकरी जाने, सैलरी कटने जैसी समस्याओं से जूझ रहे मिडिल क्लास को बजट से ढेर सारी उम्मीदें थीं। बजट से उम्मीदों की आस लगाए बैठे मिडिल क्लास को बजट से केवल झटका मिला है। बजट से कारपोरेट जगत में खुशी की लहर है, लेकिन आम जनता को इससे राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कोरोना काल में जिस तरह से लोगों की नौकरियां गईं, ऐसे में कारपोरेट सेक्टर को बूस्ट देना जरूरी था। कारपोरेट सेक्टर को बूस्ट देने से लोगों को नौकरियां मिलेंगी और मिडिल क्लास के घर में पैसा आएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने आम जनता से लेकर कारपोरेट तक सभी के बारे में सोचकर यह बजट पेश किया है। ऐसे में बजट में मिडिल क्लास को कुछ नहीं मिला, यह कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अन्य सेक्टर्स को फोकस में रखा गया है जिससे लोगों को नौकरियां मिलेंगी और उन्हें घर संभालने के लिए पैसे मिलेंगे। अब सिर्फ समय ही बता सकेगा कि वित्त मंत्री की बातें असलियत में कितनी खरी उतरती हैं, लेकिन ज्यादातर आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि कुल मिलाकर इस बजट में मध्यम वर्ग का कोई खास ख्याल नहीं रखा गया।

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