प्रादेशिक पर्यटन को नए अवतार की जरूरत

-रमेश पठानिया-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

हिमाचल के सबसे ज्यादा लोकप्रिय पर्यटन स्थल मनाली में बहुत धूमधाम से नए साल का स्वागत किया गया। हालांकि थोड़ी सावधानी की आवश्यकता थी। विंटर कार्निवल का आयोजन नए साल के आगमन को और भी रुचिकर बना देता है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सबसे अधिक दौरे इसी घाटी के होते हैं। हिमाचल प्रदेश देश के सबसे सुंदर राज्यों में से एक है। यहां गगनचुंबी देवदार के पेड़ हैं, चाय के बागान हैं, बर्फ से लदी हिमालय की चोटियां हैं, अविरल बहती नदियां हैं, झीलें हैं, प्राचीन मंदिर हैं और शांति है। देश-विदेश के पर्यटकों में यह सबसे लोकप्रिय है। साल के किसी भी मौसम में यहां पर्यटक घूमते मिल जाएंगे। मधुमास के लिए भी लोग यहां घूमने आते हैं। सर्दियों और गर्मी के मौसम में तो पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ता है। लेकिन पिछले कई सालों में पर्यटकों के लिए ज्यादा सुविधाओं का प्रावधान नहीं हुआ है। यहां तक कि हिमाचल पर्यटन के कैफे और होटल वैसे ही जी रहे हैं। कुल्लू का मोनाल कैफे जैसे अस्सी के दशक में था, अब भी वैसा ही है, जबकि पूरे भवन का और विस्तार कर पर्यटकों के लिए और सुंदर बनया जा सकता है। होटल सरवरी, जो बहुत आकर्षक जगह पर है, भूदृश्य की और अच्छे से कल्पना की जा सकती थी। मनाली का होटल ब्यास पता नहीं एक सदी से उदास लगता है। कमरों में वही फर्नीचर, समय के साथ इन्हें सब को बदलने की आवश्यकता शायद प्रदेश का पर्यटन मंत्रालय ठीक नहीं समझता। बिलासपुर का लेक व्यू कैफे कहां बदला है इतने सालों में।

प्रदेश में हिमाचल हॉलिडे होम या एक दो हॉटेल्स को अगर छोड़ दें तो बाकी सब जगह डाक बंगलो से लगने लगती हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर्यटन और फलों पर निर्भर करती है। पर्यटन को और आगे बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है, यह इन पर्यटन स्थलों में बने होटलों की स्थिति देख कर अनुमान लगाया जा सकता है। यह सब ज्यादा उत्साहित नहीं करता। नग्गर कैसल शायद सबसे खूबसूरत जगह पर है, ऐतिहासिक भवन, बड़े कमरे, लेकिन कमरों में वही पुराना उम्रदराज फर्नीचर, स्नानगृह में एक-एक पटड़ी, एक बाल्टी, एक मग, और बहुत ही साधारण सब कुछ। जब आप पर्यटकों से अच्छे दाम वसूल कर रहे हैं तो उन्हें सब आराम और सुविधाएं भी दीजिए। सर्दियों में भारी भरकम रजाइयों की जगह कम वजनदार कम्बल और कम्फर्टर का प्रयोग किया जा सकता है। हिमाचल पर्यटन विभाग को विदेशों के हिल स्टेशंस से भी कुछ सीख लेनी चाहिए। मुझे यकीन है कि सरकार के कई आला अधिकारी जो पर्यटन से जुड़े हैं, कई नामी गिरामी पहाड़ी पर्यटक स्थलों पर गए होंगे। हिमाचल में पर्यटन प्रदेश की आर्थिक सम्पदा में 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इसे कई गुना बढ़ाया जा सकता है। अगर हम पर्यटकों के लिए अच्छी लक्जरी बसों का इंतजाम करें, बसें हिमाचल सरकार खुद चलाए, किसी को अनुबंध पर न दे, न ही अनुबंध पर किसी निजी ऑपरेटर से बसें किराए पर लेकर चलाए। प्रदेश में 3679 होटल्स हैं। 2019 में करीब 17 मिलियन भारतीय और 383000 विदेशी पर्यटक हिमाचल आए। कोरोना का असर पूरे देश और विश्व की ट्रेवल इकॉनोमी पर पड़ा, तो हमारा प्रदेश कैसे अछूता रहता।

अब जबकि पर्यटन धीरे-धीरे खुल रहा है और इन सर्दियों में पर्यटकों का सैलाब हिमाचल की तरफ उमड़ रहा है, प्रदेश सरकार को आने वाले समय के लिए पूरी पर्यटन व्यवस्था को फिर से सोचना होगा, क्योंकि केवल बागवानी से ही प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाया नहीं जा सकता। हालांकि यह 45 प्रतिशत है, हमें प्रदेश के पर्यटन को शीर्ष पर लाना होगा। कब तक हम हर बात पर केंद्र सरकार से उधार लेते रहेंगे। प्रदेश सरकार को हिमाचल के पौराणिक मंदिरों के दर्शनों के लिए पर्यटकों के लिए अलग से भ्रमण की सुविधाओं के बारे में सोचना होगा। अधिक उम्र के पर्यटकों के लिए आवागमन और ऐसे स्थानों पर आराम से रहने की व्यवस्था करनी होगी। युवा पर्यटकों के लिए, जो ट्रैकिंग, हाईकिंग करना चाहते हैं, उनके लिए स्थानीय गाइड्स को रोजगार के अवसर प्रदान करने होंगे ताकि वह ट्रैकिंग करने में इच्छुक पर्यटकों को न केवल उनके गंतव्य तक ले जा सकें, अपितु प्रदेश में उस जगह के बारे में विस्तृत जानकारी भी दे सकें। यह गाइड सरकार की तरफ से पर्यटकों के लिए मुफ्त उपलब्ध करवाने होंगे। प्रदेश में कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक झीलें हैं। उनके रखरखाव और उसके आसपास के क्षेत्रों को पर्यटकों की सुविधा के लिए विकसित करना होगा, ताकि लोग आसानी से वहां समय व्यतीत कर सकें, प्राकृतिक सम्पदा को कोई नुक्सान पहुंचाए बगैर। छोटे-छोटे पर्यटक विश्राम स्थल और प्राकृतिक छटा को निहारने के लिए विशेष पॉइंट्स का निर्माण करना होगा। पहाड़ से लुप्त हो रही काठ कुणी भवन निर्माण कला को प्रदेश का पर्यटन विभाग जीवित रख सकता है।

काठ कुणी भवन निर्माण कला में छोटे-छोटे कैफे और हट्स बना कर। हिमाचल प्रदेश में शिमला, किन्नौर और कुल्लू तथा मंडी में अगर प्राचीन भवन निर्माण कला में यह सब बनाया जाएगा तो पर्यटकों को देखने में अलग आनंद प्रदान करेगा। प्रदेश में प्रचलित सभी तरह के खाने धीरे-धीरे इन जगहों पर उपलब्ध करवाने होंगे। धाम और सिड्डू के सिवाए भी। पर्यटन विभाग को योग और ध्यान के लिए अपने होटल्स में व्यवस्था करनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग प्रकृति की गोद में योग कर सकें। प्रदेश के स्थानीय योग शिक्षकों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी में अधिक से अधिक योग और ध्यान केंद्र पर्यटन विभाग खोल सकता है। इससे पर्यटन विभाग को अतिरिक्त आय होगी और पर्यटकों को स्वास्थ्य लाभ भी होगा। जो लोग लम्बे समय तक इन जगहों पर रहना चाहें, उन्हें ख़ास रियायत दी जानी चाहिए, यूरोपियन देशों की तरह। इन होटल्स के पास सरकार सब सुविधाओं से युक्त छोटे कॉटेज बना सकती है जिनमें कला, रचनात्मक और संबंधित जगत के लोग आकर एकांत में रह सकें तथा लेखन, पेंटिंग्स या दूसरी विधाओं जिनसे वह जुड़े हैं, शांतिपूर्वक काम कर सकें। हिमाचल सरकार को पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए कला स्थली जैसे विकल्प भी बनाने होंगे। युवाओं और बैकपैकर्स के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस यूथ हॉस्टल बनाने होंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा कम खर्च में पर्यटन का आनंद ले सकें। पूरी पर्यटन नीति पर फिर से सोचने की जरूरत है। हिमाचल सरकार सक्षम है, यह सब करने में।

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