श्रीमद् भागवत में निश्कपट धर्म का है वर्णण: गौरव कृष्ण गोस्वामी

नई दिल्ली, 22 अगस्त (सक्षम भारत)। छत्रपति शिवाजी समाज कल्याण एवं शिक्षा प्रचार समिति (रजि.) की ओर से आयोजित 16वें श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मटकी फोड़ कार्यक्रम गोविंदा आला रे तथा श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्रभु में तन्मयता ही भागवत कथा का फल है। आज की कथा में महाराज जी ने श्री कपिल भगवान चरित्र, श्री कपिल गीता व श्री धु्रव चरित्र प्रसंगों पर अपना विस्तृत व्याख्यान दिया।

श्री भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा का विस्तार से व्याख्यान करते हुए श्री गोस्वामी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने मात्र से ही व्यक्ति की भगवान में तन्मयता हो जाती है। धर्म जगत में जितने भी योग यज्ञ, अनुष्ठान एवं तप किए जाते हैं, उन सब का एक ही मंतव्य होता है कि भगवान में हमारी भक्ति लगी रहे।

उन्होंने आगे फरमाया कि श्री भागवत के प्रारम्भ में ही सत्य की वंदना की गई है क्योंकि सत्य सर्वत्र एंव व्यापक होता है। सत्य की चाह प्रत्येक को होती है। चाहे वह पिता अथवा पुत्र ही क्यों न हो। पिता अपने पुत्र से सत्य बोलने की अपेक्षा रखता है। यहीं नहीं चोर भी दूसरे चोर से परस्पर सत्य रखने की अपेक्षा करते हैं। अतः आरम्भ में ही श्री वेद व्यास जी ने सत्य की वंदना द्वारा मंगलाचरण किया है और भागवत कथा विश्राम भी सत्य की वंदना के द्वारा ही किया है।

गोस्वामी जी महाराज ने आगे कहा कि श्रीमद् भागवत में निष्कपट धर्म का वर्णण किया गया है। जो व्यक्ति निष्कपट हो उसे ही कथा कहने सुनने का अधिकार है। श्रीभागवत कथा का श्रवण करने के लिए आज जनसमुह उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में कृष्ण भक्त आज श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए पहुंचे।

आज के कार्यक्रम में कैलाश जैन (भाजपा, जिला अध्यक्ष नवीन शाहदरा), अजय महावर (भाजपा, जिला अध्यक्ष उत्तरी पूर्वी), प्रवेश शर्मा (चेयरमैन, शाहदरा उत्तरी जोन, ई.डी.एम.सी.), के. के. अग्रवाल (निगम पार्षद), आचार्य राजेन्द्र प्रसाद औझा, नत्थू राम जी, विष्णु गर्ग, सहित अनेक गणमान्य अतिथि सम्मिलित हुए।

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