दिवंगत नेताओं के प्रति शोक संवेदना के साथ शुरू हुआ दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र

नई दिल्ली, 22 अगस्त (सक्षम भारत)। दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही बृहस्पतिवार से शुरू हो गयी। 22 अगस्त से शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही 26 अगस्त तक चलेगी। पहले दिन की सदन की कार्यवाही विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल दिवंगत नेताओं के प्रति शोक संवेदना प्रस्ताव प्रस्तुत कर उनकी आत्मिक शांति के लिये दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। दिवंगत नेताओं में दिल्ली में 15 साल मुख्यमंत्री रही और केरल की तात्कालिक राज्यपाल शीला दीक्षित, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, दिल्ली के पूर्व महानगर पार्षद सुशील चैधरी व दलबीर कुमार टंडन, दिल्ली विधानसभा के पूर्व सदस्य मांगे राम गर्ग व मोती लाल सोढ़ी आदि के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की और दिल्ली के विकास में उनके उल्लेखनीय कार्यों की सराहना भी की।

विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने दिल्ली की लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के राजधानी के विकास, हरित क्षेत्र को बढ़ाने, महिला उत्थान और दूसरे विशेष उल्लेखनीय कार्यों के लिये प्रशंसा की। दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित के बाद सदन में सत्ता पक्ष की ओर से डीडीए द्वारा तुगलकाबाद क्षेत्र के जहांपनाह सिटी फॉरेस्ट में बने गुरु रविदास के ऐतिहासिक मंदिर को क्षतिग्रस्त करने से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा कराने की मांग की। इस पर सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई। विपक्ष ने जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) मामले पर दिल्ली की सत्तारूढ़ दल के रूख पर चर्चा कराने की मांग संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग की। लेकिन सत्तारूढ़ दल के सभी सदस्य विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल के आसन के सामने वेल में आकर संत रविदास मंदिर के तोड़े जाने के विरूद्ध शोर-शराबा, हंगामा और नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि संत रविदास मंदिर को उच्चतम न्यायालय के आदेशों पर तोड़ा गया है। लेकिन दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में मजबूत के साथ अपना पक्ष नहीं रखा। इसकी वजह से वर्ष 1509 में यानी लगभग 600 वर्ष पूर्व स्थापित संत रविदास मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। इससे देश के लाखों-करोड़ों अनुसूचित जाति व सर्व समाज के लोगों की आस्थाओं को आहत किया गया है।

सत्ता पक्ष के हंगामे, शोर शराबे व नारेबाजी की वजह से विधानसभा अध्यक्ष को दो बार सदन की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा। सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से शुरू होने के बाद इस विषय पर सत्ता पक्ष के सदस्य विशेष रवि की ओर से संकल्प प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया है। सदन की ओर से संकल्प किया गया कि सदन दलित समुदाय के इस विश्वास का सम्मान करता है कि यह जगह अफगान तानाशाह सिकंदर लोदी द्वारा संत रविदास को दान की गई थी जिन्हें व्यापक रूप से दलित और अन्य समुदायों द्वारा पूजा जाता है।

यह एक एतिहासिक महत्व का स्थल है जहां स्वयं संत रविदास कुछ दिन आकर रहे थे और यह दलित समुदाय की पहचान और अधिकारों के लिये उनके संघर्ष का प्रतीक है। इस मंदिर के तोड़े जाने से न केवल धार्मिक भावनाएं क्षत-विक्षत हुई हैँ बल्कि दलित समुदाय के संघर्ष का इतिहास भी। सदन ने संकल्प किया कि केंद्र सरकार से भूमि आबंटन के पश्चात राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार इस जगह पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाए।

संकल्प प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्यों विशेष रवि के अलावा समाज कल्याण व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति विभाग के मंत्री राजेन्द्रपाल गौतम, सहीराम पहलवान, मनोज कुमार, ओम प्रकाश शर्मा (भाजपा), अवतार सिंह कालका, अजय दत्त, संजीव झा, पंकज पुष्कर, जगदीप सिंह, राखी बिरला, सौरभ भारद्वाज व अन्यों ने अपने-अपने विचार सदन के समक्ष व्यक्त किये। संकल्प को सदस्यों की सहमति के बाद पारित कर दिया गया।

भाजपा सदस्य विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने विधानसभा में संत रविदास मंदिर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि संत रविदास सर्व समाज के संत हैं। भारत के गर्व, गौरव व भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। समाज को दिशा देने, ऊंच नीच, छुआछूत व सर्वसमाज को जोड़ने की बात की और पूरा समाज उनके पद चिन्हों पर चल कर अपने को धन्य समझता है। सदन में सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा विद्वेष पूर्ण वक्तव्य देकर उपरोक्त कृत्य के लिए भाजपा को दोषी ठहराना अपनी राजनैतिक रोटी सेकने जैसा है। जिसकी हम निंदा करते हैं। इस प्रकरण में उच्चतम न्यायलय में संत रविदास मंदिर समिति द्वारा अदालत में केस लड़ा गया। अदालत ने मुख्य सचिव दिल्ली को आदेश देकर उस कार्य को किया जहां तक भाजपा की बात है, मंदिर वहीं बनाएंगे, मंदिर सभी बनाएंगे। बाबा साहब अंबेडकर ने जहां-जहां प्रवास किया, विधानसभा के सामने बाबा साहब का भव्य स्मारक भाजपा की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनवाया। कबीर चोरा बनारस को भव्यता भाजपा ने प्रदान की। बौद्ध सर्किट भी मोदी जी की भाजपा सरकार द्वारा बनवाने का कार्य किया गया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल ने संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अपना वक्तव्य सदन में देते हुये कहा कि संत रविदास का सम्मान सभी वर्गों में हैं। उन्होंने जातपात का विरोध किया। उनकी वाणी में सबको अन्न मिलने की बात है। दिल्ली सरकार के लिए संत रविदास अदृश्य शक्ति की तरह हैं। सभी वर्गों के लिए दिल्ली सरकार काम कर रही है। बिजली, पानी स्वास्थ और अन्न की चिंता गरीबों को करने की जरूरत नही है। तो हमारा काम संत रविदास की सोच जैसा है। सन्त रविदास की वाइब्रेशन किसी और जगह पर नहीं मिल सकती। जो समाज संतों का सम्मान नहीं कर सकता, वो आगे नहीं बढ़ सकता। लेकिन इस मुद्दे पर गंदी राजनीति चल रही है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सभी समाज के लोग अनुयायी है। देश में 12 से 15 करोड़ लोग रविदास जी से आते हैं। ये करोड़ो लोग 5 अकड़ जमीन मांग रहे हैं तो कौन-सी बढ़ी चीज मांग रहे हैं। पूरे देश का फारेस्ट सिर्फ 5 एकड़ पर ही बनेगा क्या? ये 4 एकड़ जमीन डीडीए संत रविदास के लिए दें 100 एकड़ मैं दे दूंगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार उच्चतम न्यायलय में हल्फनामा दाखिल करेगी। इसमें केंद्र सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण और उप-राज्यपाल दिल्ली पार्टी हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संत रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण के समाधान के दो तरीके भी सदन में बताये। उन्होंने कहा कि एक तरीका है समीक्षा याचिका उच्चतम न्यायलय के समक्ष दाखिल की जाए और इसमें कानून एवं व्यवस्था का हवाला भी दिया जाए। दूसरा तरीका अध्यादेश पारित कर 4-5 एकड़ जमीन दे दी जाए। अगर केंद्र ऐसा करती है तो दिल्ली सरकार भव्य मंदिर बनाएगी।

उधर, मुख्यमंत्री के अध्यादेश लाने वाले वक्तव्य पर नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने विरोध जताया। सदस्य ओपी शर्मा ने अपनी बात रखी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्ति जताई और विपक्ष को शांत रहने को कहा। लेकिन इसके बाद भी वह अपनी बात रखते रहे। इस पर अध्यक्ष गोयल ने नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता व सदस्य ओपी शर्मा दोनों को मार्शल के जरिये बाहर करवा दिया।

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