चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में कदम रखते समय हमारी धड़कनें थम सी गई थीं: इसरो प्रमुख (राउंड अप)

बेंगलुरु, 20 अगस्त (सक्षम भारत)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा है कि मंगलवार को चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में कदम रखने का प्रयास करते समय हमारे दिल की धड़कनें लगभग थम सी गई थीं। सिवन ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने जब चंद्रयान-2 को चंद्रमा के इर्द-गिर्द एक कक्षा में प्रवेश कराने के लिए उसके तरल इंजन को फायर करना शुरू किया तब हमारी धड़कनें तेज हो गई थीं। चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए लूनर ऑर्बिट इन्सर्शन (एलओआई) प्रक्रिया के प्रणोदन प्रणाली के माध्यम से सुबह नौ बजकर दो मिनट पर सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद सिवर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, करीब 30 मिनट तक हमारे दिल की धड़कनें लगभग थम सी गई थीं। सिवन ने कहा कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया के दौरान स्थिति काफी अलग और तनाव भरी होगी क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है जबकि एलओआई चंद्रयान-1 के दौरान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था। उन्होंने कहा, अभी तनाव बढ़ गया है, घटा नहीं है। बहरहाल, इसरो को सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर पूरा विश्वास है। सिवन ने कहा, हमने विभिन्न प्रणालियों के पर्याप्त परीक्षण किये हैं, जितना संभव हो सकता था, हमने किया है। चंद्रयान-2 ने 14 अगस्त को चंद्रमा अंतरण मार्ग (लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी) में कदम रखा था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) लगे हैं। वह 22 जुलाई को जीएसएलवी एमके।।। यान के माध्यम से धरती से उड़ चला था। इसरो ने कहा कि इसके बाद यान को चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजर रही इसकी अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए चार और कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इसके बाद लैंडर विक्रम दो सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसरो ने कहा कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर साॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। बेंगलूरु के नजदीक ब्याललू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के एंटीना की मदद से बेंगलूरू स्थित इसरो, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशन्स कांप्लेक्स (एमओएक्स) से यान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसरो ने कहा कि अगली कक्षीय प्रक्रिया बुधवार को दोपहर साढ़े 12 से डेढ़ बजे के बीच की जाएगी। देश के कम लागत वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम को पंख लगाते हुए इसरो के सबसे शक्तिशाली तीन चरण वाले रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-एम1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था।प्रक्षेपण के बाद चंद्रयान-2 ने गत 14 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्र पथ पर आगे बढ़ना शुरू किया था। इसरो का यह अब तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन है। यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चैथा देश बन जाएगा। चंद्रयान-2 मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है। इससे पहले गत 15 जुलाई को रॉकेट में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टाल दिया गया था। समय रहते खामी का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक समुदाय ने इसरो की सराहना की थी। चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है। इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी। यह ऐसी नई खोज होगी जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा। पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद इसरो ने भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क-।।। के जरिए 978 करोड़ रुपये की लागत से बने चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रम और दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं। लैंडर विक्रम का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। दूसरी ओर, 27 किलोग्राम वजनी प्रज्ञान का मतलब संस्कृत में बुद्धिमता है।ऑर्बिटर, चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करेगा और पृथ्वी तथा चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के बीच संकेत प्रसारित करेगा।लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया है।प्रज्ञान नाम का रोवर कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स) संचालित 6-पहिया वाहन है।इसरो के अनुसार, चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव रोचक जगह है जहां उत्तरी ध्रुव के विपरीत अंधकार छाया रहता है। चांद के इस अंधेरे क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।

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