निशाने पर नेता

-सिद्वार्थ शंकर-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता सियासी रंजिश का शिकार होते आ रहे हैं। अब तक पार्टी के कुछ अहम नेताओं की वहां हत्याएं हो चुकी हैं। यही स्थिति जम्मू-कश्मीर की भी है। राज्य में जब से अनुच्छेद 370 को हटाया गया है, तब से यहां भाजपा के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। कश्मीर में आतंकियों ने एक और भाजपा नेता को निशाना बनाया है। सेना अध्यक्ष के कश्मीर दौरे के बीच आतंकियों ने त्राल में नगर पालिका के अध्यक्ष कश्मीरी पंडित और भाजपा नेता राकेश पंडिता की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकी हमले में एक महिला भी जख्मी हुई है, जिसे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। तीन की संख्या में बताए जा रहे हमलावर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश में सुरक्षा बलों ने पूरा इलाका घेर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। उधर, पुलिस ने दावा किया है कि राकेश पंडिता को निजी सुरक्षा के लिए दो पीएसओ दिए गए थे, लेकिन बुधवार को वे बिना सुरक्षा के ही त्राल चले गए। पुलिस के अनुसार राकेश पंडिता पुत्र सोमनाथ पंडिता बुधवार को त्राल बाला इलाके में अपने मित्र मुस्ताक भट के घर आए थे। इसी दौरान तीन अज्ञात आतंकियों ने राकेश पंडिता पर करीब से फायरिंग कर दी। गोलीबारी में पंडिता और उनके मित्र की बेटी चपेट में आ गईं। दोनों को फौरन अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन राकेश पंडिता की मौत हो गई। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने 6 अगस्त 2020 को भाजपा सरपंच सरपंच सजाद अहमद की गोलीमारकर हत्या कर दी थी। घटना के समय वह अपने घर के बाहर थे। इससे पहले जुलाई 2020 में भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी। वहीं इस घटना के एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी। इन सभी घटनाओं को आपस में जोड़कर देखें तो पता चलेगा कि आतंकी संगठन अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से खफा हैं और पड़ोसी मुल्क की शह पर भाजपा के नेताओं को निशाना बना रहे हैं। पंडिता की हत्या की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा द रेजिजटैंस फ्रंट ने ली है। हालांकि, मौजूदा हमले में किन आतंकियों का हाथ था अभी सुरक्षाबल उनकी तलाश में जुटे हैं। इस संगठन का निर्माण धारा-370 हटाए जाने के बाद किया गया था। जाहिर है कि आतंकी सरकार के कदम से किस तरह बौखलाए हैं और वे भाजपा के नेताओं को निशाना बना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से अबतक नौ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की हत्या कर दी गई है, जो अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। आतंकियों की ओर से खुलेआम धमकी दी जा रही है कि घाटी के युवा भाजपा के साथ ना आएं। पिछले साल युवाओं में डर बैठाने 8 जुलाई को ही बीजेपी नेता वसीम बारी, उनके भाई और पिता की हत्या कर दी गई थी। 4 अगस्त को कुलगाम के आखरन नौपुरा में संरपच आरिफ अहमद पर जानलेवा हमला हुआ। 6 अक्टूबर को गांदरबल में भी जिला भाजपा उपाध्यक्ष गुलाम कादिर राथर को मार दिया गया था। इसके अलावा पिछले महीने बडगाम में बीजेपी कार्यकर्ता और बीडीसी अध्यक्ष को आतंकियों ने मार गिराया था। जून 2020 से अब तक ऐसे ही हमलों में पंडिता को मिलाकर 9 के करीब भाजपा नेताओं की हत्या कर दी गई है। बता दें कि सुरक्षाबलों द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अपने ऑपरेशन में तेजी लाई गई है, यही कारण है कि आतंकी संगठन बौखला गए हैं। इसी वजह से आतंकी बार-बार सुरक्षाबलों और पब्लिक फिगर को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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