पश्चिम एशिया संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा, $383 बिलियन पहुंच सकता है व्यापार घाटा, ICICI बैंक की रिपोर्ट में तेल की कीमतों पर बड़ी चेतावनी
नई दिल्ली, 17 मार्च (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और भारत के व्यापार संतुलन पर पड़ना शुरू हो गया है। ICICI बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 66 डॉलर के औसत से काफी अधिक है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों में तनाव के कारण दुनिया के 20 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के चालू खाता घाटा (CAD) को लगभग 12 अरब डॉलर तक बढ़ा देती है।
मध्य पूर्व के संकट ने भारत के वस्तु व्यापार घाटे के अनुमान को $363 अरब से बढ़ाकर $383 अरब डॉलर कर दिया है। भारत के कुल वस्तु निर्यात का 15% हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है, जो युद्ध की स्थिति में सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) का 38% हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है। यदि तनाव और लंबा खिंचता है, तो प्रवासियों की कमाई और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर इसका गहरा नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2027 में CAD के जीडीपी का 1.4% तक पहुँचने की आशंका है।
चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारत के गैर-तेल निर्यात में 5% की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन सोने के आयात में 29% और अन्य आयातों में 10.6% की बढ़ोतरी ने व्यापार संतुलन पर भारी दबाव बनाया है। हालांकि रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि यह बाधाएं लंबे समय तक नहीं चलेंगी, लेकिन अल्पकालिक अवधि में तेल की ऊंची कीमतें भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं। सरकार और केंद्रीय बैंक को अब डॉलर की मजबूती और आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर विचार करना होगा ताकि घरेलू महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सके।
