चुनाव से परे नई चुनौतियों का बजट
-: ऐजेंसी/सक्षम भारत :-
अक्सर केंद्र की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि वह चुनाव देखकर बजट बनाती है। मगर वर्ष 2026-27 के बजट में चुनावी घोषणाएं नहीं हैं। वर्ष 2014 से सत्ता में आई भाजपा आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाती दिखती है। नए बजट मं राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत लाने की बात कर महंगाई पर नियंत्रण के लिए कुछ नए उपायों को दर्शाया गया है।
सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘वीबी-जी राम जी’ के लिए 95000 करोड़ रु. और मनरेगा के लिए भी 30000 करोड़ रु. का प्रावधान किया है। आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने की सोच को आगे बढ़ाने में सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इसी के साथ 20 नए जल मार्ग बनाने की तैयारी है। बैटरी सस्ती कर मोबाइल, ई-वाहन क्षेत्र को मदद दी है। सूर्य ऊर्जा को बढ़ावा देने के उपाय किए हैं। क्षेत्र अनुसार बड़े टेक्सटाइल पार्क, चार दक्षिणी राज्यों में खनिज कॉरिडोर, तीन केमिकल पार्क का निर्माण किया जाएगा।
लघु उद्योगों को दस हजार करोड़ रु. की सहायता मिलेगी। इसके बीच ही हर बार केंद्रीय बजट में उछलता-कूदता शेयर बाजार नए कर से बड़ा झटका खा गया। उसने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण खत्म होते-होते 3000 अंकों का गोता लगा दिया। अंत में सेंसेक्स 1546.84 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। पूंजी बाजार पर यह असर वायदा कारोबार पर ‘सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स’ (एसटीटी) बढ़ाए जाने की घोषणा के कारण नजर आया।
हालांकि यह दुर्लभ संयोग ही था, जब बजट पेश होने की वजह से रविवार को शेयर बाजार खुला। सरकार का दावा है कि उसकी नीतियां औद्योगिक विकास को बढ़ाने के लिए हैं, जिसके लिए वह 350 से अधिक आर्थिक सुधार कर चुकी है। उसका मानना है कि तकनीक के माध्यम से देश में कला, डिजाइन, फैशन, फिल्म, संगीत और डिजिटल कंटेंट को वैश्विक स्तर पर विस्तार मिल रहा है।
वह देश में ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ के क्षेत्र में ‘पर्सनल क्रिएटिविटी’, ‘स्किल’ और ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी’ को बढ़ावा देना चाहती है। जिसके लिए मुंबई के ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीस’ को 15 हजार सेकेंड्री स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब’ स्थापित करने में मदद का प्रस्ताव दिया है। भारत में ‘एनिमेशन’, ‘विजुअल इफेक्ट्स’, ‘गेमिंग’ और ‘कॉमिक्स सेक्टर’ तेजी से बढ़ते क्षेत्र हैं, जिसमें वर्ष 2030 तक 20 लाख पेशेवर लोगों की जरूरत होगी। तकनीक के अलावा स्वास्थ्य का क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में है, जिसके लिए उसने बायो फार्मा सेक्टर को 10 हजार करोड़ देने का प्रावधान किया है।
वहीं मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए 36 दवाओं को सस्ता किया है। सरकार देश में मेडिकल हब बनाना चाहती है। वह तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान(एम्स) बनाने की भी तैयारी में है। आयकर में नई छूट न देते हुए उसने नया आयकर अधिनियम लागू कर कुछ राहत देने की घोषणा की है। निश्चित ही चुनावी दबाव नहीं होने से सरकार ने शेयर बाजार जैसे संवेदनशील क्षेत्र को छूने का प्रयास किया।
फिलहाल रविवारीय बजट में आराम से अधिक काम करने पर बल है, जिससे नए और विकसित भारत की कल्पना को बल मिल सकता है। कुछ अलग घोषणाओं से कहीं खुशी, कहीं गम स्वाभाविक है। किंतु आगे देखना होगा कि रोजगार और महंगाई पर बजट कितना असर दिखाता है।
