आशीष को ओलंपिक के लिए आर्थिक मदद

-भूपिंदर सिंह-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

संसार में प्रौद्योगिकी व चिकित्सा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति से खेल का स्तर भी बहुत ऊपर चला गया है। विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने लिए बहुत अधिक सुविधाओं की जरूरत होती है। इस सबके लिए लाखों नहीं, करोड़ों रुपए चाहिए होते हैं। इसलिए उच्च स्तर पर जब खिलाड़ी पहुंच जाता है तो उसे वहां पर अच्छी राशि के वजीफे की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाडि़यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम व भागीदारी का जिम्मा भारत सरकार के खेल मंत्रालय व उस खेल के राष्ट्रीय महासंघ का होता है, मगर खेल राज्य सूची का विषय होने के कारण खिलाड़ी की आर्थिक व हर प्रकार की सुविधा का जिम्मा राज्य सरकार का भी होता है।

खिलाड़ी किसी न किसी राज्य का नागरिक तो होगा ही, इसलिए वह चाहता है कि उसे अपने गृह राज्य में परिचय भी मिले और आश्रय भी, मगर बहुत से स्टार खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके साथ हिमाचल प्रदेश का नाम नहीं है। हिमाचल प्रदेश की संतानों ने पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से पार पाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में विश्व स्तर तक सफलता की उंचाइयों को छुआ है। खेल जगत में ओलंपिक खेलों का विशिष्ट स्थान है। ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करने के लिए संसार की कुछ चुनिंदा टीमों या व्यक्तिगत क्वालीफाई रैंक में आने के लिए बहुत सी प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करना पड़ता है। इसलिए कहा जाता है कि ओलंपिक खेलों में भाग लेना ही बहुत गर्व की बात है। हिमाचल प्रदेश की कई संतानों ने ओलंपिक में हिस्सा ही नहीं लिया, अपितु वहां पर पदक विजेता प्रदर्शन भी किया है। मगर इन सबकी प्रतिभा खोज व प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश का योगदान शून्य था।

इन सबके साथ हिमाचल प्रदेश का नाम न होकर किसी अन्य राज्य व केंद्रीय विभागों का नाम रहा है। मगर हिमाचल प्रदेश की धरती से अपना खेल कैरियर शुरू करने वालों में कुछ एक नाम हैं जो ओलंपिक क्वालीफाई के काफी नजदीक आकर भी चूक गए थे। 1984 ओलंपिक खेलों के लिए दिल्ली में आयोजित हुई राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में सुमन रावत ने नए राष्ट्रीय कीर्तिमानों के साथ 1500 व 3000 मीटर की दौड़ों में स्वर्ण पदक विजेता बनकर भी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। 2004 ओलंपिक के लिए चेन्नई में हुई राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पुष्पा ठाकुर ने 400 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक विजेता बनने के बाद भी भारत की 4 गुणा 400 मीटर रिले टीम का हिस्सा नहीं बन पाई थी। इस सिलसिले को तोड़ते हुए पिछले साल जार्डन में संपन्न हुई ओलंपिक क्वालीफाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश के आशीष चैधरी ने टोक्यो ओलंपिक का टिकट पक्का कर हिमाचल प्रदेश का पहला खिलाड़ी बन गया है जिसके साथ हिमाचल प्रदेश का भी नाम है। स्वर्गीय भगत राम डोगरा व माता दुर्गा देवी के घर 18 जुलाई 1994 को सुंदरनगर शहर के साथ लगते जरल गांव में जन्मे आशीष की प्रारंभिक शिक्षा व कालेज की पढ़ाई सुंदरनगर में ही हुई। 2015 केरल में आयोजित हुए राष्ट्रीय खेलों में हिमाचल प्रदेश के लिए स्वर्ण पदक विजेता बनने के साथ ही आशीष चैधरी ने 2020 ओलंपिक, जो कोरोना महामारी के कारण अब 2021 में हो रहे हैं, तक पहुंचने की आश भी जगा दी थी। पिछले वर्ष 2019 में संपन्न हुई एशियाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर आशीष ओलंपिक क्वालीफाई के काफी नजदीक आ गया। 2015 से आशीष लगातार राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला में चल रहे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। 2017 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने आशीष को खेल आरक्षण के अंतर्गत मंडी जिला की धर्मपुर तहसील के कल्याण अधिकारी की नौकरी दी है। आशीष के पिता जी का लंबी बीमारी के बाद पिछले साल ही स्वर्गवास हुआ है।

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखने के लिए धन की बहुत जरूरत होती है। इस कालम के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार को अपने इस ओलंपिक क्वालीफाई खिलाड़ी की आर्थिक सहायता के लिए बार-बार लिखा जा रहा है। पिछले खत्म हुए साल के आखिरी माह में जब आशीष चैधरी दो महीने के यूरोपीय दौरे के बाद वापस एक सप्ताह के लिए घर छुट्टी आया तो खेल मंत्री राकेश पठानिया से मिला और अपनी ट्रेनिंग व ओलंपिक तक की भावी प्रतियोगिताओं के बारे में चर्चा की थी। खेल मंत्री ने ओलंपिक तक तैयारी के लिए दो किस्तों में माकूल धन राशि हिमाचल सरकार की तरफ से देने का आश्वासन दिया। साथ ही ओलंपिक में पदक विजेता प्रदर्शन करने के लिए आशीर्वाद भी दिया। खेल मंत्री ने आशीष को कहा कि ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बाद जब हिमाचल प्रदेश वापस लौट कर आओगे तो हिमाचल प्रदेश सरकार बैंड-बाजे से अपने लाल का स्वागत करेगी। आशीष चैधरी हिमाचल प्रदेश में अपना प्रशिक्षण शुरू कर लगातार हिमाचल प्रदेश की तरफ से नेशनल में प्रतिनिधित्व करते हुए ओलंपिक तक पहुंचने वाला पहला खिलाड़ी है। हिमाचल प्रदेश अपने लाडले से ओलंपिक में स्वर्णिम सफलता की आशा करता है तथा उसे तहे दिल से शुभकामनाएं देता है।

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