मनोरंजन

‘सर मैडम सरपंच’ में एक बार फिर से दिखेगी सीमा बिस्वास की अद्भुत अदाकारी

मुंबई, 03 अप्रैल (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। असल कहानी और सामाजिक व्यंग्य से भरपूर एक मजबूत फ़िल्म ‘सर मैडम सरपंच’ 14 अप्रैल से विश्व भर में रिलीज के लिए तैयार है, जिसमें लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री सीमा बिस्वास की अदाकारी देखने को मिलेगी। वह इस फोल्म में इंफ्लुएंसर दादी अम्मा के किरदार में हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक प्रवीण मोरछले की फिल्म ‘सर मैडम सरपंच’ कुछ भारतीय लड़कियों की अविश्वसनीय कहानियों पर आधारित है, जो उच्च अध्ययन के लिए विदेश चली गईं और अपने गांवों की सरपंच बनने के लिए घर लौटीं। इसने हाल ही में 28 फरवरी से 7 मार्च के बीच फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित वेसौल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एशियन सिनेमाज (वीआईएफएफएसी) के 29वें संस्करण में इनाल्को जूरी अवार्ड जीता। फिल्म अब 14 अप्रैल को दुनिया भर में रिलीज होने के लिए तैयार है।

प्रवीण मोरछले कहते हैं ,”मैंने इन अविश्वसनीय महिलाओं के बारे में पढ़ा था, जिन्होंने अपने देश से प्यार के चलते अपने गांवों के लिए कुछ करने के लिए विदेश में आराम और नौकरी के अवसरों को छोड़कर घर लौटने का फैसला लिया। मेरी फिल्म उन सुपरवुमन की जमीनी स्थिति को दर्शाती है, जिससे ये साबित होता है कि ये अपने आप में सुपरवुमन हैं। प्रवीण फिल्म के प्रचार के हिस्से के रूप में मुख्य अभिनेत्री एरियाना सजनानी के साथ माया विश्वकर्मा से मिलेंगे।

सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद माया विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में साई खेड़ा तहसील के मेहरागांव गांव की निर्विरोध सरपंच चुनी गईं। उन्होंने स्वराज्य मुमकिन है नामक एक किताब लिखी है, जो उनके अपने मेहरागांव जैसे आत्मनिर्भर गांव में शिक्षा और जागरुकता के महत्व पर आधारित है। ‘पैडवुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जानी जाने वाली यह सामंती महिला सुकर्मा फाउंडेशन की संस्थापक-अध्यक्ष हैं।

फिल्म में एरियाना सजनानी उस भारतीय लड़की एना का किरदार निभा रही हैं, जो अमेरिका में पली-बढ़ी है, मध्य भारत में अपने पैतृक गांव में एक पुस्तकालय शुरू करने के लिए लौटती है।

नॉर्थ्रिज से थिएटर में स्नातक करने वाली द्विभाषी यूरेशियन एरियाना कहती हैं कि “सौम्य हास्य और सूक्ष्मता के साथ हमने यह दिखाने की कोशिश की है कि पुस्तकों को प्रचलित यथास्थिति के लिए एक खतरे के रूप में कैसे देखा जा सकता है। जमीनी स्तर की राजनीति, भ्रष्टाचार और पितृसत्ता पर ‘सर मैडम सरपंच’ सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपने सामाजिक दायरे में काम करने वाली महिलाओं के लचीलेपन का जश्न मनाती हैं।” उन्होंने कैलिफोर्निया और मैनहट्टन, न्यूयॉर्क में द एक्टर्स स्टूडियो ड्रामा स्कूल से मास्टर डिग्री प्राप्त की है।

लेखक-निर्देशक प्रवीण मोरछले की 2017 की फीचर फिल्म वॉकिंग विद द विंड ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म (लद्दाखी), सर्वश्रेष्ठ ध्वनि डिजाइन (सनल जॉर्ज) और सर्वश्रेष्ठ री-रिकॉर्डिंग (जस्टिन जोस) के लिए 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के साथ-साथ आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पदक के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए। 49वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उनकी 2018 की उर्दू फिल्म विडो ऑफ साइलेंस एक कश्मीरी महिला के बारे में है, जिसका पति सात साल से लापता है, फिर भी सरकार उसे मृत घोषित करने को तैयार नहीं है। इसे रॉटरडैम, गोथेनबर्ग, लॉस एंजिल्स और बेल्जियम सहित 35 से अधिक प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है। इसने पांच अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं और इसे 2019 में भारत से आने वाली सबसे महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ykhij,lhj,lhi