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अगस्त 2023 तक पूरी हो सकती है एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी की विलय प्रक्रिया

नई दिल्ली, 08 जुलाई (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी की विलय प्रक्रिया अगले साल अगस्त में पूरी हो सकती है। विलय प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद दोनों कंपनियों की सब्सिडियरी कंपनियों का भी एचडीएफसी बैंक में ही विलय हो जाएगा। इससे दोनों कंपनियों के ग्राहकों को एक ही जगह बैंकिंग और होम लोन समेत सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। अभी ग्राहकों को इन सुविधाओं के लिए अलग-अलग इन दोनों कंपनियों या सब्सिडियरी कंपनियों के ब्रांच में जाना पड़ता है।

आपको बता दें कि विलय के इस प्रस्ताव को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा दोनों कंपनियों के विलय प्रस्ताव को 2 जुलाई को ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) से भी मंजूरी मिल गई है। लेकिन विलय प्रक्रिया पूरी करने के पहले दोनों कंपनियों को अपने-अपने शेयर होल्डर्स और कर्जदाताओं की भी मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा कंपटीशन कमिशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से भी इन दोनों कंपनियों के विलय प्रस्ताव को मंजूरी मिलनी बाकी है। उम्मीद की जा रही है कि इस तिमाही के अंत तक एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय प्रस्ताव को सीसीआई और एनसीएलटी से मंजूरी मिल सकती है।

एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी के विलय को इंडियन बैंकिंग इंडस्ट्री का सबसे बड़ा विलय माना जा रहा है। इससे एचडीएफसी बैंक की ताकत काफी बढ़ जाएगी। इस विलय के बाद एचडीएफसी बैंक के देश की सबसे अधिक मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली टॉप 5 कंपनियों में भी शामिल होने के आसार बन जाएंगे। फिलहाल एचडीएफसी देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बैंक है। वहीं एचडीएफसी होम लोन और इस तरह के अन्य कर्ज देने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।

एचडीएफसी बैंक की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक दोनों कंपनियों की विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एचडीएफसी बैंक का मालिकाना हक पूरी तरह से पब्लिक शेयर होल्डर्स के पास होगा। इसमें एचडीएफसी के मौजूदा शेयर होल्डर्स की 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी। इस विलय प्रक्रिया के तहत एचडीएफसी के शेयर होल्डर्स को हर 25 शेयर के बदले एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर दिए जाएंगे।

मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के मुताबिक इस विलय प्रक्रिया के पूरा होने के बाद एचडीएफसी बैंक भारतीय स्टेट बैंक के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय बैंक बन सकता है। ऐसा होने से जहां उसके ग्राहकों की संख्या में तेजी से विस्तार होगा, वहीं लोन मार्केट में भी एचडीएफसी बैंक की स्थिति और मजबूत हो सकेगी। इस विलय के बाद एचडीएफसी बैंक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपना कारोबार बढ़ाने में काफी सहूलियत होगी, जिससे विदेश में बसे भारतीय या भारतीय मूल के लोगों को तो फायदा होगा ही, विदेशी नागरिकों के जरिए होने वाले कारोबार से भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की भी प्राप्ति हो सकेगी।

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