बजट से उम्मीदें, सबका रखा जाएगा ख्याल

-जयंतीलाल भंडारी-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

फिलहाल देश की निगाह आगामी एक फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट पर है। ऐसे संकेत हैं कि कोरोना संकट के बीच कृषि और किसान हितों, बुनियादी ढांचे की मजबूती, उद्योग-कारोबार की गतिशीलता, शेयर बाजार को प्रोत्साहन, रोजगार के नए अवसर, महंगाई पर नियंत्रण, नई मांग का निर्माण, टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाने के अलावा छोटे करदाताओं, मध्य वर्ग, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें पूरी करने के साथ विकास दर के ऊंचे लक्ष्य घोषित किए जाएंगे।
पिछले साल का बजट बनाते हुए वित्तमंत्री के सामने जितनी मुश्किलें थीं, उनकी तुलना में इस बार मुश्किलें कुछ कम हैं। सरकारी खजाने की स्थिति संतोषप्रद है। पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने और विनिवेश लक्ष्य के उम्मीद से कम होने के बावजूद राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर स्थिति काबू में है। चालू वित्त वर्ष में नवंबर के अंत तक सरकार की कुल प्राप्तियां 13.78 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो बजट अनुमान का 69.8 प्रतिशत है। जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में सरकार की प्राप्तियां बजट अनुमान का 37 फीसदी ही थीं।
राजस्व संग्रह में सुधार के कारण सरकार का राजकोषीय घाटा अप्रैल-नवंबर, 2021 में वित्त वर्ष 2021-22 के लक्ष्य के मुकाबले 46.2 प्रतिशत रहा, जबकि 2020-21 की समान अवधि में राजकोषीय घाटा लक्ष्य के 135.1 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। वित्तमंत्री खेती-किसानी की राह और आसान करते हुए दिखाई दे सकती हैं। कृषि ऋण के लक्ष्य को बढ़ाकर 18 से 18.5 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में यह लक्ष्य 16.5 लाख करोड़ रुपये है। प्राकृतिक खेती और मांग आधारित खेती के प्रोत्साहन के लिए विशेष घोषणा की जा सकती है।
किसानों की गैर कृषि आय बढ़ाने के लिए पशुधन विकास, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन, कृषि अनुसंधान पर अधिक आवंटन, अधिक एमएसपी, पीएम आशा और भावांतर भुगतान जैसी योजना और छोटे किसानों के जन-धन खातों में अधिक नकद हस्तांतरण जैसे कदमों की घोषणा भी की जा सकती है। चालू वित्त वर्ष में मनरेगा के लिए बजट आवंटन 73,000 करोड़ रुपये था। इस बार मनरेगा के बजट में वृद्धि होने की संभावना है। पिछले बजट में बुनियादी ढांचे के लिए 5.54 लाख करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था। आगामी बजट में यह राशि बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये हो सकती है।
किफायती आवास, रियल एस्टेट और निर्माण पर सरकार का ज्यादा जोर हो सकता है। देश में खुदरा कारोबार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने और कारोबार करने के लिए आवश्यक लाइसेंस की संख्या घटाने की दिशा में भी घोषणा हो सकती है। एमएसएमई के लिए विशेष राहत पैकेज दिया जा सकता है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) को अधिक उपयोगी बनाने के लिए भी घोषणा हो, तो आश्चर्य नहीं। छोटे करदाताओं और मध्यवर्ग की मुश्किलों के बीच 2020 में लागू नई आयकर व्यवस्था को आकर्षक बनाने का एलान किया जा सकता है।
करदाताओं को राहत देते हुए कर में छूट की सीमा को दोगुना कर पांच लाख किया जा सकता है। धारा 80सी के तहत कर छूट की सीमा मौजूदा डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई से तीन लाख रुपये की जा सकती है। आगामी बजट में आतिथ्य, पर्यटन, आराम और संपर्क वाली अन्य सेवाओं को समर्थन दिया जा सकता है। आने वाले दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ ऑटोमेशन के बढ़ते दखल को देखते हुए इन्हें प्रोत्साहन देने हेतु खास एलान किया जा सकता है। नवसृजित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के गठन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
उम्मीद है कि वित्तमंत्री राजकोषीय घाटे को जीडीपी के करीब छह फीसदी तक रखते हुए अर्थव्यवस्था को गतिशील करने, रोजगार का अवसर बढ़ाने, निवेश प्रोत्साहन देने तथा लोगों को राहत देने के लिए प्रोत्साहनों से भरपूर बजट पेश करेंगी। इससे क्रय शक्ति बढ़ेगी, उद्योग-कारोबार की गतिशीलता बढ़ेगी, वहीं आगामी वित्त वर्ष में विकास दर करीब आठ फीसद के स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकती है।

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