कृषि-किसान केंद्रित होगा नया बजट

-डा. जयंतीलाल भंडारी-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

इन दिनों एक फरवरी 2022 को प्रस्तुत किए जाने वाले वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस नए बजट में कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रमुख प्राथमिकता के रूप में दिखाई देगा। उम्मीद है कि कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन के लिए सरकार आगामी 2022-23 के बजट में कृषि ऋण के लक्ष्य को बढ़ाकर 18 से 18.5 लाख करोड़ रुपए कर सकती है। चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य 16.5 लाख करोड़ रुपए है। कृषि क्षेत्र में ऊंचे उत्पादन के लिए कर्ज की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। संस्थागत ऋण की वजह से किसान गैर-संस्थागत स्रोतों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने से भी बच पाते हैं। नए बजट में गांवों के विकास की स्वामित्व योजना और ऑपरेशन ग्रीन स्कीम का दायरा बढ़ाने की उम्मीद है। नए बजट में किसानों के सशक्तिकरण और कृषि विकास के विशेष प्रावधान होंगे। इसका संकेत प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और कृषि मंत्री के वक्तव्यों से लगातार उभरकर दिखाई दे रहा है। एक जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 10वीं किस्त के तहत 10 करोड़ 9 लाख लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में 20946 करोड़ रुपए ट्रांसफर करके किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए कहा कि अब कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) के माध्यम से किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखा जाएगा। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक पीएम मोदी किसानों को लाभ पहुंचाने हेतु अधिकतम प्रयासरत हैं।

कृषि विकास और छोटे किसानों की समस्याओं के निराकरण हेतु कई योजनाएं लाई गई हैं और अब नई योजनाएं भी दिखाई देंगी। गौरतलब है कि नए बजट 2022-23 में कृषि को वैसा ही मजबूत आधार देने का प्रयास किया जाएगा, जिस तरह कोरोना के घातक संक्रमण के बीच पिछले दो केंद्रीय बजटों में दिखाई दिया है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि पिछले दो वर्षों में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र पाया गया है जिसमें लगातार विकास दर बढ़ी है। कोविड में देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था थम गई थी, लेकिन कृषि का पहिया चलता रहा, महामारी के दौर में भी किसानों ने बंपर पैदावार की, सरकार ने भी बंपर खरीदी की। अब नए बजट के प्रावधानों से वर्ष 2022 में कृषि एक बार फिर अपनी प्रासंगिकता सिद्ध करते हुए दिखाई दे सकेगी। नए बजट के तहत कृषि विकास की ऊंची उम्मीदों को साकार करने और देश के करोड़ों छोटे किसानों को मुस्कुराहट देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण बातों पर विशेष ध्यान दिखाई दे सकेगा। नए बजट से वर्ष 2022 में देश के कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने के और अधिक प्रोत्साहन दिखाई देंगे। वर्ष 2022-23 के नए बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने के मद्देनजर खाद्य प्रसंस्कृत क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ाने के नए प्रावधान दिखाई दे सकते हैं। ज्ञातव्य है कि अब खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को आगे बढ़ाने हेतु जून 2021 से केंद्र सरकार के द्वारा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 10900 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ यह योजना लागू की जा चुकी है। इस योजना को उपयुक्त रूप से क्रियान्वित करके छोटे किसानों की आमदनी में बड़ी वृद्धि की जा सकती है। नए बजट में देश से कृषि उत्पादों और मसालों के निर्यात के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावनाओं को साकार करने की रणनीति भी आगे बढ़ती हुई दिखाई दे सकती है। उल्लेखनीय है कि विश्व बाजार में पिछले दो वर्षों में भारत के कृषि उत्पादों और मसालों की खुशबू की धमक बहुत अधिक बढ़ी है। मिर्च, अदरक, हल्दी और जीरे वाली फसलों का निर्यात शानदार रहा है।

चूंकि देश में मसाले की खेती में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया, अतएव इसका असर वैश्विक बाजार में मसालों के निर्यात पर पड़ा है। वर्ष 2014-15 में जहां 67.64 लाख टन मसालों का उत्पादन किया गया था, वहीं यह वर्ष 2020-21 में बढ़कर 1.07 करोड़ टन हो गया है। देश से चालू वित्त वर्ष 2021-22 में कृषि निर्यात के 43 अरब डॉलर के लक्ष्य को सरलता से प्राप्त कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि वर्ष 2022-23 के नए बजट में नए कृषि निर्यात प्रोत्साहनों के आधार पर आगामी वर्ष में 2022-23 में कृषि निर्यात 50 से 60 अरब डॉलर के मूल्य तक पहुंच सकता है। जहां किसानों की जमीनों को सुरक्षा देने के लिए पिछले वर्ष तक दिए गए 22 करोड़ सॉयल हेल्ड कार्ड की संख्या नए बजट से बढ़ाई जा सकती है, वहीं देश में 86 प्रतिशत छोटे किसान हैं जिनकी ताकत बढ़ाने के लिए 6850 करोड़ रुपए के खर्च से 10 हजार एफपीओ बनाने का काम नए बजट से गतिशील होते हुए दिखाई दे सकता है। उम्मीद है कि आगामी वर्ष 2022-23 के बजट में स्वामित्व योजना के तहत तेजी से अधिक गांवों को शामिल करते हुए वहां के किसानों को उनकी रहवासी जमीन का कानूनी हक देकर आर्थिक सशक्तिकरण किए जाने के अभियान को तीव्रगति से आगे बढ़ाया जाएगा। पिछले वर्ष 6 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में देश के 3000 गांवों के 1.71 लाख ग्रामीणों को जमीनों के स्वामित्व पत्र सौंपे हैं। ज्ञातव्य है कि मध्यप्रदेश के वर्तमान कृषि मंत्री कमल पटेल के द्वारा वर्ष 2008 में उनके राजस्व मंत्री रहते तैयार की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास अधिकार योजना के तहत 2 अक्तूबर 2008 को हरदा के दो गांवों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में भूखंडों के मालिकाना हक के पट्टे ग्रामीण आवास अधिकार पुस्तिका के माध्यम से किसानों को सौंपे गए थे।

इस अभियान से अनेक लोगों ने अपनी स्वामित्व की जमीन पर बैंकों से सरलतापूर्वक ऋण लेकर छोटे-कुटीर और ग्रामीण उद्योग शुरू किए हैं। इन गांवों में किसानों की आय बढ़ी है। ऐसे में नए बजट के तहत स्वामित्व योजना को अधिक तेजी से लागू करके किसानों के लिए खेती की विभिन्न ऋण जरूरतों को सरलता से पूरा करने और किसानों की गैर कृषि आय बढ़ाने में नया महत्त्वपूर्ण स्त्रोत बनाया जा सकेगा । यद्यपि एक दिसंबर 2021 को तीन कृषि कानून राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद औपचारिक रूप से वापस हो गए हैं । लेकिन कृषि कानून वापस होने के बाद अब कृषि की विकास दर बढ़ाने और छोटे किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि सुधारों की जरूरत बनी हुई है। उम्मीद है कि नए बजट से इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। प्राकृतिक खेती को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि फसलों के एमएसपी बढ़ाए जाने की नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। किसानों को लाभान्वित करने के लिए पीएम आशा और भावांतर भुगतान जैसी कोई योजना लागू की जाएगी। ऊंचे दाम वाली विविध फसलों के उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे और छोटे किसानों के जनधन खातों में अधिक नकदी हस्तांतरण से उनकी आमदनी में वृद्धि जैसे कदमों की घोषणा भी नए बजट में की जाएगी। हम उम्मीद करें कि आगामी वर्ष 2022-23 के बजट में कृषि विकास एवं किसानों के सशक्तिकरण के ऐसे जोरदार प्रावधान होंगे जिनसे कृषि क्षेत्र में रिकार्ड उत्पादन होगा, कृषि निर्यात में ऊंचाई आएगी, किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही इससे ग्रामीण भारत की समृद्धि बढ़ेगी।

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