मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्री एचईसी की आर्थिक हालत खराब, सात महीने से वेतन नहीं मिला, रांची स्थित तीनों प्लांटों के कामगार हड़ताल पर

रांची, 02 दिसंबर (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) एक दौर में देश में मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्री के रूप में मशहूर था, लेकिन आज इसकी आर्थिक सेहत इतनी खराब है कि अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं हैं। पिछले सात महीनों से वेतन नहीं मिलने से नाराज एचईसी के सभी तीन प्लांटों के तकरीबन तीन हजार कर्मचारियों ने गुरुवार को टूलडाउन हड़ताल कर दी है। इसके कारण कारखाने का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है। इसके पहले बीते सोमवार को भी कर्मचारियों ने वेतन भुगतान की मांग को लेकर कंपनी के पांच अधिकारियों को लगभग छह घंटे तक एक कमरे में बंद कर दिया था।

गुरुवार सुबह की पाली में आठ बजे हैवी मशीन बिल्डिंग प्लांट (एचएमबीपी) के कर्मियों ने ड्यूटी पर पहुंचते ही कामकाज ठप करा दिया। इसके बाद फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) और हैवी मशीन टूल्स प्लांट (एचएमटीपी) के भी कर्मचारियों ने टूल डाउन कर दिया। सैकड़ों कर्मचारी प्लांट के बाहर गेट पर जमा हो गये। बताया जा रहा है कि तीनों प्लांटों में उत्पादन ठप होने के बाद रक्षा क्षेत्र और नौ सेना से मिले वर्क ऑर्डर के कुछ उपकरणों का निर्माण कार्य बंद हो गया।

कर्मचारियों का कहना है, एचईसी प्रबंधन के आला अफसर वेतन भुगतान को लेकर गंभीर नहीं हैं। कर्मचारी जब प्लांटों में उपकरणों का निर्माण कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें वेतन क्यों नहीं मिल रहा है। दशहरा, दिवाली, छठ जैसे त्योहार बगैर वेतन के आर्थिक तंगी के बीच गुजरे, लेकिन इसके बाद भी कॉरपोरेशन का प्रबंधन ठोस तौर पर यह नहीं बता रहा कि बकाया वेतन का भुगतान कब होगा। इधर एचईसी प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर कोई पक्ष नहीं रखा है। कुछ अधिकारियों का कहना है कंपनी के पास वर्किं ग कैपिटल की कमी होने की वजह से यह परेशानी पैदा हुई है।

फिलहाल कंपनी के पास लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर है। इसमें से 1200 करोड़ का वर्क ऑर्डर पूरी तरह फाइनल है, लेकिन वर्किं ग कैपिटल के अभाव में इसकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गयी है। कर्मचारियों को छह महीने और अधिकारियों को सात महीने से वेतन नहीं मिला है। सिर्फ वेतन मद का बकाया 45 करोड़ के आस-पास पहुंच गया है। कंपनी में अभी 1350 स्थायी अफसर-कर्मचारी हैं। वहीं करीब 1700 सप्लाई मजदूर काम करते हैं। हर माह कंपनी की वेज बिलिंग लगभग सात करोड़ है। कर्मियों को मिलने वाले भत्ते और अन्य मदों को मिला दें तो कामगारों पर प्रतिमाह का खर्च लगभग साढ़े ग्यारह करोड़ का होता है।

आलम यह है कि कंपनी बिजली बिल तक का भुगतान नहीं कर पा रही है। दो माह पहले झारखंड बिजली आपूर्ति निगम ने कारखाने की बिजली काट दी थी, जिसे बाद में आला अधिकारियों के हस्तक्षेप पर वापस बहाल कराया गया था। तीनों प्लांटों की बड़ी मशीनों को चलाने के लिए विशेष ऑयल की जरूरत पड़ती है। कंपनी यह ऑयल तक नहीं खरीद पा रही है। एचईसी की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने हाल में भी रिपोर्ट मंगायी थी।

बता दें कि एचईसी इस्पात, खनन, रेलवे, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु और सामरिक क्षेत्रों के लिए उपकरणों का निर्माण करता रहा है। लगभग 2100,000 वर्ग मीटर में चल रही कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1958 को हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 नवंबर 1963 को कंपनी को राष्ट्र को समर्पित किया था। उस वक्त इसे मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्री कहा गया। आज मदर ऑफ इंडस्ट्री पर संकट के बादल हैं।

एचईसी ने 1971 के युद्ध में इंडियन माउंटेन टैंक, 105 एमएम गैन बैरल,105 एमएम गैन बैरल,टी- 72 टैंक की कास्टिंग,120 एमएम गन का हीट ट्रीटमेंट और मशीनिंग, आईएनएस राणा के लिए गियर सिस्टम का निर्माण, युद्धपोत के लिए आरमर प्लेट का निर्माण, आधुनिक रडार, परमाणु पनडुब्बी के महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण किया है। चंद्रयान-जीएसएलवी के लिए लॉन्च पैड बनाने में भी एचईसी की भूमिका रही।

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