हमें तीसरी लहर के कयासों से पहले से ही अपने होश-ओ-हवास को दुरुस्त रखना होगा

-अशोक भाटिया-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

कोरोना वायरस की दूसरी लहर से भारत जूझ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में नए मामलों और रोजाना होने वाली मौतों के आंकड़ों ने दुनियाभर का रिकॉर्ड तोड़ दिया और अब कहा जा रहा है कि भारत में तीसरी लहर भी आएगी। आने वाली तीसरी लहर और भी अधिक विकराल हो सकती है। इस बीच कोविड-19 संक्रमण संबंधी अनुमान जताने के लिए गणित का इस्तेमाल करने वाले सूत्र मॉडल से जुड़े वैज्ञानिक एम विद्यासागर ने कहा कि यदि देश में टीकाकरण अभियान तेज नहीं किया गया और कोविड-19 से निपटने के लिए आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया गया, तो आगामी छह से आठ महीने में कोविड की तीसरी लहर आने की आशंका है।

वैज्ञानिक विद्यासागर ने इसके साथ ही कहा कि सूत्र मॉडल में किसी तीसरी लहर की संभावना नहीं जताई गई हैं और इस पर काम किया जा रहा है। आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर विद्यासागर ने कहा कि यदि एंटीबॉडी समाप्त हो जाती है, तो प्रतिरोधी क्षमता कम होने की आशंका है। ऐसे में टीकाकरण बढ़ाया जाना चाहिए और कोविड-19 को फैलने से रोकने में मददगार नियमों का पालन किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो छह से आठ महीने में तीसरी लहर आने की आशंका है।बता दें कि केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने पहले ही कहा है कि देश में कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी। लेकिन यह नहीं पता कि यह कब आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना की दूसरी लहर इतनी भीषण और लंबी होगी, इसका अनुमान नहीं लगाया गया था।

के विजय राघवन ने कहा था कि वायरस के अधिक मात्रा में सर्कुलेशन हो रहा है और तीसरी लहर भी आएगी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब आएगी और किस स्तर की होगी। हमें नई लहरों के लिए तैयारी करनी चाहिए।’’ वैज्ञानिक सलाहकार ने यह भी कहा कि वायरस के स्ट्रेन पहले स्ट्रेन की तरह की फैल रहे हैं। इनमें नई तरह के संक्रमण का गुण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वेरिएंट्स के खिलाफ वैक्सीन प्रभावी हैं। देश और दुनिया में नए वेरिएंट्स आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एक लहर के खत्म होने के बाद सावधानी में कमी आने से वायरस को फिर से फैलने का मौका मिलता है।

हमें तीसरी लहर के कयासों से पहले से ही अपने होश-ओ-हवास को दुरुस्त रखना होगा और ऐसे पुख्ता इन्तजाम करने होंगे कि कोरोना हमारी तैयारियों से तौबा करने लगे। मगर यह कार्य विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के जबानी जमा-खर्च से नहीं होगा बल्कि जमीन पर चीखें मारती हकीकत को समझने से होगा। हकीकत यह है कि आज हर भारतीय के दरवाजे पर कोरोना दस्तक देकर उसकी रातों की नींदें उड़ा रहा है। सबसे पहले हमें इस माहौल को बिदा करने की व्यवस्था करनी होगी और तब सोचना होगा कि तीसरी लहर की आहट होने से पहले ही हम पुख्ता दम हो जायें। यह काम सब भारतवासियों को मिल कर ही करना होगा क्योंकि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों को आंख में काली फंगस की बीमारी जिस तरह पांव पसार रही है उससे एक नई समस्या खड़ी हो सकती है। इसकी तरफ प्रधानमन्त्री ने भी आज ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कोरोना को बहुरूपिया भी बताया और कहा कि यह रूप बदलने में माहिर है अतः हमें रात- दिन चैकन्ना होकर इससे लड़ना होगा।

मगर असली सवाल यह है कि हम तीसरी लहर को आने से रोकोगे कैसे? इसका केवल एक ही उपाय है कि भारत के दो साल के बच्चे से लेकर बूढे़ आदमी तक को वैक्सीन लगाई जाये। क्योंकि तीसरी लहर का सबसे ज्यादा प्रकोप किशोरों और बच्चों पर पड़ने की आशंका ही वैज्ञानिक व्यक्त कर रहे हैं। भारत की 139 करोड़ की आबादी में से अभी तक केवल 18.5 करोड़ लोगों को ही वैक्सन लग पाई है । 18 से 45 वर्ष तक के युवाओं को विगत 1 मई से जो वैक्सीन लगाने की शुरूआत की गई थी उसके तहत अभी तक एक करोड़ से कम लोगों को वैक्सीन लगी है। इससे देश में खासकर युवा वर्ग में निराशा का वातावरण बन रहा है। इस वातावरण को हमें हर हालत में तोड़ना होगा और तय करना होगा कि अधिकतम अगले वर्ष के जनवरी महीने तक हर युवा के भी वैक्सीन लग सके।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि हमारे किशोरों की पढ़ाई का पूरा साल बेकार चला गया है। बच्चों का बचपन जैसे उनसे छिन गया है और वे घरों में ही कैद होकर रह गये हैं। भारत के 40 प्रतिशत के करीब परिवार एक कमरे के मकान में रहते हैं। इनके बच्चों की मनः स्थिति का अंदाजा बड़े-बड़े बंगलों या खुले घरों में रहने वाले लोग कभी नहीं लगा सकते। कोरोना ने हमारे बच्चों का बचपन छीन कर सबसे बड़ा अमानवीय कृत्य किया है अतः उसे परास्त करने के लिए हमें अभी से पक्के इन्तजाम करने होंगे। आज पूरे देश की जरूरत कोरोना से निजात पाने की है न कि इस पर राजनीति करने की। क्योंकि यदि तीसरी लहर आ गई तो यह पूरी की पूरी पीढ़ी को ही बर्बाद कर सकती है। हमें अपनी पुरानी गलतियों से इस तरह सबक सीखना होगा कि आगे किसी को भी हम पर अंगुली उठाने की हिम्मत न हो। यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन यह आंकलन करता है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर राजनीतिक व धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से आयी तो हमें केवल राजनीतिक मोर्चे पर ही नहीं बल्कि धार्मिक मोर्चे पर भी आत्म संयम रखते हुए अपने-अपने भगवान या अल्लाह को अपने दिलों में बसा कर ही उसकी इबादत करनी होगी। हमें धर्म और अध्यात्म के रहस्यों के भौतिकतावादी सच के मर्म को समझते हुए ही अपने व्यवहार में वक्त के मुताबिक परिवर्तन लाना होगा और इसकी हकीकत मिर्जा गालिब ने अपने इस शेर में लिख कर अपने वक्त में पूरी दुनिया के धार्मिक विद्वानों व मीमांसकों को चकरा दिया था।

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