कभी करते थे नौकरी, आज हैं करोड़ों दिलों की धड़कन, बैंक अधिकारी से शिवाजी साटम कैसे बने ‘एसीपी प्रद्युम्न’?
मुंबई, 21 अप्रैल (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। अभिनेता शिवाजी साटम आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। बैंक अधिकारी से लेकर CID के ACP प्रद्युम्न बनने तक उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। जानिए उनके करियर और निजी जीवन की खास बातें।
21 अप्रैल 1950 को मुंबई में जन्मे शिवाजी साटम आज 2026 में अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई से पूरी की और करियर की शुरुआत बैंक अधिकारी के रूप में की।
नौकरी के साथ-साथ वे थिएटर से जुड़े रहे, जहां से उनके अभिनय का सफर शुरू हुआ। यही मंच उनके लिए फिल्मों और टीवी की दुनिया का रास्ता बना। सीआईडी सीरियल में एसीपी प्रद्युम्न का किरदार निभाकर शिवाजी साटम घर-घर में मशहूर हो गए। उनकी डायलॉग डिलीवरी और गंभीर व्यक्तित्व ने उन्हें टीवी का सबसे लोकप्रिय पुलिस चेहरा बना दिया। आज भी लोग उन्हें उसी किरदार से पहचानते हैं।
फिल्मों में पुलिस रोल से बनाई पहचान
छोटे पर्दे के अलावा Shivaji Satam ने फिल्मों में भी सहायक अभिनेता के तौर पर मजबूत पहचान बनाई। ‘100 डेज’,‘यशवंत’ और ‘विनायक’ जैसी फिल्मों में उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर की दमदार भूमिका निभाई। वहीं ‘वास्तव’,‘गुलाम ए मुस्तफा’ और ‘गौरव’ जैसी फिल्मों में पुलिस कमिश्नर के किरदार में भी वे खूब पसंद किए गए।
विविध किरदारों में भी दिखा दम
हालांकि वे सोनी टीवी पर आने वाले फेमस सीरियल सीआईडी में अपने पुलिस रोल के लिए मशहूर हैं, लेकिन उन्होंने कई फिल्मों में पिता, डॉक्टर और प्रोफेसर जैसे किरदार भी निभाए। ‘सूर्यवंशम’ और ‘नायक’ में पिता की भूमिका, वहीं ‘पेस्टोन्जी’ और ‘फिलहाल’ में डॉक्टर के रूप में उनका अभिनय सराहा गया।
असल जिंदगी में भी लोग समझते हैं पुलिस
शिवाजी साटम का पुलिस किरदार इतना प्रभावशाली रहा है कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी पुलिस अधिकारी मान लेते हैं। कई बार लोग उनसे मदद तक मांग चुके हैं, जो उनकी लोकप्रियता का बड़ा प्रमाण है।
निजी जीवन और परिवार
व्यक्तिगत जीवन में शिवाजी साटम बेहद सरल और शांत स्वभाव के माने जाते हैं। उनकी पत्नी अरुणा साटम और बेटे अभिजीत साटम उनके परिवार का हिस्सा हैं। अभिजीत भी अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं, जबकि मराठी अभिनेत्री मधुरा वेलणकर उनकी बहू हैं।
पुरस्कार और उपलब्धियां
अपने शानदार अभिनय के लिए शिवाजी साटम को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें 2000 में कलाश्री अवॉर्ड, 2003 में इंडियन टेली अवॉर्ड और 2012 में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
