मैं नंबर तीन पर खेलना चाहती थी लेकिन कप्तान के तौर आप ऐसे नहीं सोच सकते : जेमिमा
वडोदरा, 21 जनवरी (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) की कप्तान जेमिमा रॉड्रिग्स के लिए मुंबई इंडियंस (एमआई) के ख़िलाफ मिली जीत महज दो अंक नहीं, बल्कि राहत की एक बड़ी सांस लेकर आई है। इस सीजन कप्तानी और बल्लेबाज़ी, दोनों ही मोर्चों पर संघर्ष कर रहीं जेमिमा ने न केवल अपनी टीम को जीत की पटरी पर लौटाया, बल्कि ख़ुद भी नाबाद 51 रनों की कप्तानी पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच भी रहीं। डीसी जब अपनी सीजन की शुरुआत कर रही थी, तब बल्लेबाज़ी क्रम को लेकर तीन बड़े सवाल थे। शेफ़ाली वर्मा के साथ ओपन कौन करेगा? क्या जेमिमानंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करेंगी? लिज़ेल ली और लौरा वुलफ़ॉर्ट किस पोज़ीशन पर बल्लेबाज़ी करेंगी? एमआई के ख़िलाफ़ मिली जीत के बाद प्रेस कांफ़्रेंस के दौरान जेमिमा ने खुलासा किया कि वे निजी तौर पर नंबर तीन पर खेलना चाहती थीं, लेकिन टीम की जरूरत के आगे उन्होंने अपना मन बदल लिया।
उन्होंने कहा, “सच कहूं तो मैं नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करना चाहती थी, लेकिन कप्तान के तौर पर मैं सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोच सकती। मुझे टीम को पहले रखना था। टीम के नजरिए से लौरा वुलफ़ॉर्ट नंबर तीन के लिए बेहतर थीं क्योंकि वे दक्षिण अफ़्रीका के लिए भी ओपनिंग करती हैं और नई गेंद को अच्छा टाइम करती हैं। नंबर चार पर मैं ज़्यादा सहज हूं क्योंकि मैं स्पिनर्स को बेहतर खेल सकती हूं और पहली ही गेंद से गैप ढूंढने में सक्षम हूं। लौरा एक बेहतरीन उप कप्तान भी हैं और मैदान पर मेरी बहुत मदद करती हैं। मुझे उनके साथ बल्लेबाज़ी करना और उनके कवर ड्राइव देखना बहुत पसंद है।”
पिछले तीन सीज़न तक डब्ल्यूपीएल के फ़ाइनल में पहुंचने वाली डीसी की टीम इस सीजन उस तरह की लय में नहीं है। उन्हें पहली जीत अपने तीसरे मैच में यूपीडब्ल्यू के ख़िलाफ़ मिली और वह भी 20वें ओवर की आख़िरी गेंद पर। फ़िलहाल उनकी टीम दो जीत के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर है। ऐसे में अपनी कप्तानी के बारे में जेमिमा ने कहा, “नई चीज़ों में तालमेल बिठाने और यह समझने में वक़्त लगता है कि क्या काम कर रहा है और क्या नहीं। कप्तानी कोई तयशुदा चीज नहीं है। आप एक फिक्स्ड प्लान के साथ नहीं चल सकते। आपको मैदान पर अपने इंस्टिंक्ट (अंतर्मन) पर भरोसा करना होता है। मैं भी ख़ुद पर भरोसा करना सीख रही हूं। मैं ख़ुद को ग़लतियां करने की जगह दे रही हूं। लेकिन इंसान ग़लतियों से ही सीखता है और जैसे जैसे मैं और कप्तानी करूंगी, बेहतर होती जाऊंगी।” टूर्नामेंट में अब तक जेमिमा की बल्लेबाज़ी पर भी काफ़ी चर्चा हुई है। एमआई के ख़िलाफ उन्होंने सीजन का पहला पचासा लगाया। इससे पहले गुजरात जायंट्स के ख़िलाफ़ उन्होंने नौ गेंदों में 15 रनों की एक अच्छी पारी खेली थी, जिससे डीसी की टीम 210 रनों के लक्ष्य के काफ़ी क़रीब पहुंच गई थी, लेकिन आख़िरी ओवर में जब छह गेंदों में सात रनों की दरकार थी, तब वह उस ओवर की पहली ही गेंद पर आउट हो गईं और उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा।
जेमिमाह ने इस सीजन में अपनी बल्लेबाज़ी के बारे में कहा, “पिछले मैचों में मैं तब उतरी जब आख़िरी के कुछ ओवर बचे थे और हमें 15 की औसत से रन चाहिए थे। मैंने वहां इम्पैक्ट पारियां खेलीं, लेकिन कमी बस यह थी कि मैं मैच फ़िनिश नहीं कर पा रही थी। आज मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मैं टीम को जीत दिलाकर नाबाद लौटी।” “इस मैच से पहले मैंने कुछ लोगों से बातचीत की, जिन पर मैं भरोसा करती हूं, और उन्होंने मुझसे कहा कि शुरुआत में ख़ुद को थोड़ा समय दूं। मुझे पता था कि अगर मैं शुरुआती 10 गेंदें खेल लेती हूं और मन में स्पष्टता रहती है, तो यहां रन बनाना आसान हो जाएगा। पहली पारी के दौरान मैंने सीवर ब्रंट और हरमन की बल्लेबाज़ी को देखते हुए भी थोड़ा सीखा कि इस पिच पर कैसे बल्लेबाज़ी करनी चाहिए।”
