क्रिसिल की रिपोर्ट में खुलासा, मार्च में मांसाहारी थाली की कीमतों में आई गिरावट, शाकाहारी थाली के दाम रहे स्थिर, टमाटर की महंगाई को प्याज और आलू ने किया संतुलित
नई दिल्ली, 07 अप्रैल (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। क्रिसिल इंटेलिजेंस की नवीनतम ‘रोटी चावल दर’ रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में आम आदमी की रसोई के बजट को लेकर मिश्रित संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, घर पर तैयार की जाने वाली मांसाहारी (नॉन-वेज) थाली की लागत में पिछले वर्ष की तुलना में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, शाकाहारी (वेज) थाली की कीमतें पिछले वर्ष के समान स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। मांसाहारी थाली के सस्ता होने का मुख्य कारण ‘ब्रॉयलर’ (मुर्गे) की कीमतों में आई 2 प्रतिशत की कमी है, जो इस थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा कवर करता है। हालांकि, खाद्य तेल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में हुई वृद्धि ने थाली की कीमतों में और अधिक गिरावट की संभावनाओं को सीमित कर दिया है।
शाकाहारी थाली की कीमतों के स्थिर रहने के पीछे सब्जियों के दामों में आया विरोधाभासी बदलाव प्रमुख रहा। मार्च 2025 की तुलना में टमाटर की कीमतों में 33 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया और यह ₹21 से बढ़कर ₹28 प्रति किलो तक पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कम पैदावार रही। हालांकि, टमाटर की इस महंगाई के असर को प्याज और आलू की गिरती कीमतों ने पूरी तरह संतुलित कर दिया। खरीफ की बंपर आवक और निर्यात में कमी के कारण प्याज के दामों में 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है, जबकि होटल और रेस्टोरेंट क्षेत्र से मांग कम होने के चलते आलू की कीमतें भी साल-दर-साल 13 प्रतिशत तक कम हुई हैं।
यदि फरवरी 2026 से तुलना की जाए, तो मार्च के महीने में उपभोक्ताओं को मासिक आधार पर अधिक राहत मिली है। महीने-दर-महीने आधार पर शाकाहारी थाली की लागत में 3 प्रतिशत और मांसाहारी थाली में 2 प्रतिशत की कमी देखी गई है। इसके साथ ही, बाजार में पुराना स्टॉक अधिक होने के कारण दालों की कीमतों में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम आदमी को प्रोटीन के स्रोतों के लिए कम खर्च करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी महीनों में मानसून अनुकूल रहता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होता है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में और अधिक स्थिरता आने की उम्मीद की जा सकती है।
