शराब और बीयर के शौकीनों को लगेगा महंगाई का बड़ा झटका, कंपनियों ने की कीमतों में 15 फीसदी बढ़ोतरी की मांग, वैश्विक तनाव और कच्चे माल के दामों में उछाल बनी मुख्य वजह
नई दिल्ली, 26 मार्च (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव की लहर अब सीधे तौर पर भारत के शराब और बीयर उद्योग तक पहुंच गई है। कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण देश के दो प्रमुख उद्योग निकायों ने राज्य सरकारों से शराब की कीमतों में 15 प्रतिशत तक की तत्काल बढ़ोतरी करने की औपचारिक अपील की है। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ (CIABC) के अनुसार, शराब बनाने और उसकी पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत अब “असहनीय” स्तर पर पहुंच गई है, जिससे कंपनियों के लिए मौजूदा दरों पर कारोबार जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
उद्योग जगत के मुताबिक, सबसे बुरा असर पैकेजिंग सेक्टर पर पड़ा है। प्राकृतिक गैस की कमी के कारण कांच की बोतलों के दाम 12% तक बढ़ गए हैं, वहीं बोतलों के ढक्कन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की कीमतों में 35% का उछाल आया है। बीयर कैन के लिए जरूरी एल्युमिनियम और पैकेजिंग कार्टन के दाम भी लगभग दोगुने हो गए हैं। ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (BAI) ने चेतावनी दी है कि यदि प्रति केस 25 से 30 रुपये की बढ़ोतरी नहीं की गई, तो बीयर कंपनियां भारी घाटे में डूब जाएंगी। उद्योग के जानकारों का मानना है कि इस लागत वृद्धि का सीधा बोझ अब उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय है।
शराब उद्योग भारत सरकार के खजाने में सालाना करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जमा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्य सरकारों ने समय रहते कीमतों में संशोधन की अनुमति नहीं दी, तो आने वाले महीनों में बाजार में शराब की भारी किल्लत हो सकती है। इससे न केवल कंपनियों का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा, बल्कि सरकारी राजस्व को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। वर्तमान में यूनाइटेड ब्रुअरीज और एब इनबेव जैसी बड़ी कंपनियां घाटे से बचने के लिए सरकारों के साथ निरंतर संवाद कर रही हैं ताकि आपूर्ति सुचारू बनी रहे और कीमतों को संतुलित तरीके से बढ़ाया जा सके।
