‘ऑफलाइन टीचिंग मोड’ की उत्सुकता

-प्रो. सुरेश शर्मा-

-: ऐजेंसी सक्षम भारत :-

हिमाचल प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में एक बार फिर से फरवरी माह में बहार आने वाली है। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लगभग साढ़े दस महीने से बंद पड़े शिक्षण संस्थान फिर से खुलने वाले हैं। प्रदेश सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में लिए निर्णय के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षण संस्थानों को खोलने के संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी है। ग्रीष्मकालीन पाठशालाओं को दो फरवरी 2021 से खोलने के आदेश हो चुके हैं। इसके लिए सर्वप्रथम अध्यापकों को 27 जनवरी से पाठशालाओं में उपस्थित होने को कहा गया है ताकि वे अपनी-अपनी पाठशाला में विद्यार्थियों के आने से पूर्व व्यवस्था का जायजा लेकर प्रबंधन कर लें। इसी प्रकार पहली फरवरी से इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, आठ फरवरी से महाविद्यालय तथा पंद्रह फरवरी से शीतकालीन पाठशालाएं नियमित रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देंगी। प्रारंभिक तथा माध्यमिक कक्षाओं के लिए अभी भी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।

लंबे अंतराल से लगभग ठप्प पड़ी शिक्षा व्यवस्था के फिर से पटरी पर लाने के उद्देश्य से जहां प्रदेश में अभिभावकों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की उत्सुकता बढ़ी है, वहीं पर अभी भी यह कार्य असंभव तो नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण अवश्य है। शिक्षण संस्थान खोलने से पहले राज्य सरकार ने कोविड-19 के ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स’ का कड़ाई से पालन करने तथा संस्थानों के पूर्ण रूप से सेनेटाइजेशन के निर्देश दिए हैं। सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन एवं प्रशासन को विद्यार्थियों की अधिकतम एवं न्यूनतम संख्या के आधार पर शिक्षण की व्यवस्था कर समय-सारणी का निर्माण कर सामाजिक व शारीरिक दूरी के अनुसार कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था, फेस-मास्क, हैंड सेनेटाइजर तथा थर्मल स्कैनर आदि की व्यवस्था करनी होगी। सरकार के निर्देशानुसार कोविड-19 का कड़ाई से पालन किया जाएगा। हालांकि विद्यार्थियों को उपस्थिति के लिए स्कूलों में आने का कोई भी दबाव नहीं होगा। अगर विद्यार्थी चाहें तो वे ऑनलाइन पढ़ाई भी कर सकते हैं। चुनौतीपूर्ण तथा विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार की यह कोशिश है कि लंबे अंतराल से चैपट पड़ी शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जाए। बंद पड़ी शिक्षा व्यवस्था से परेशान बहुत से विद्यार्थी तथा अभिभावक एवं शिक्षक चाहते हैं कि फिर से शिक्षण संस्थानों में वास्तविक शिक्षण हो। विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों ने यह माना है कि बेशक ऑनलाइन शिक्षण ने इस संकट की विशेष परिस्थिति में उनका साथ देकर भारी नुकसान से बचाया हो, परंतु वास्तविक शिक्षण प्रशिक्षण, शिक्षण वातावरण तथा शिक्षक के द्वारा सीधे तौर पर प्राप्त किए गए ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है। वैश्विक महामारी के समय में तकनीक तथा संचार साधन शिक्षण व्यवस्था के लिए वरदान भी साबित हुए हैं। कई महीनों से चरमरा चुकी शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए सरकार, शिक्षा विभाग, संस्थागत प्रशासन तथा शिक्षकों को बहुत ही जि़म्मेदारी से कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। शिक्षण संस्थानों को कार्यात्मक बनाने के लिए सभी शिक्षण संस्थाओं के मुखियाओं, शिक्षकों तथा कर्मचारियों को सक्रिय होना पड़ेगा। कोविड-19 की ‘एसओपी’ के अधीन चलने वाली व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होने वाले संस्थानों में सचेत होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

जहां बच्चों तथा अभिभावकों में शिक्षण संस्थान खोलने को लेकर हर्ष, प्रसन्नता तथा उत्सुकता है, वहीं पर अभी भी कुछ लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से आशंका, डर तथा संदेह भी है। शिक्षण संस्थानों में जहां पर सही निर्देशन व प्रबंधन करने की जि़म्मेदारी होगी, वहीं पर अध्यापकों पर विद्यार्थियों की नजदीक आती परीक्षाओं के मद्देनजर पाठ्यक्रम पूरा करवाने तथा उसकी पुनरावृत्ति करवाने का दायित्व होगा। कोविड-19 की वजह से प्रभावित पढ़ाई के कारण इस वर्ष राज्य सरकार ने पांचवीं तथा आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं न करवाने का फैसला लिया है। शिक्षा में गुणवत्ता के उद्देश्य से लागू की गई डिटेंशन पॉलिसी के मद्देनजर राज्य सरकार इस बार कोरोना के कारण पढ़ाई प्रभावित होने पर इसे अमल में नहीं लाएगी। कोरोना काल में इस सत्र में मैट्रिक, जमा एक तथा जमा दो की शिक्षा विशेष रूप से प्रभावित हुई है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को जहां परीक्षा में अच्छे अंक लाने की चिंता है, वहीं पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार रहने की भी चुनौती रहेगी। कोविड-19 तथा सरकार की गाइडलाइंस के कारण सभी पाठशालाओं में अभी प्रातः कालीन सभाओं का आयोजन नहीं हो पाएगा। इस सत्र में कोई भी सांस्कृतिक समारोह, सामाजिक गतिविधियां, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोहों के आयोजन पर भी प्रतिबंध ही रहेगा। महाविद्यालय स्तर पर सत्र 2020-21 के विद्यार्थियों को स्तरोन्नत करने का कार्य पूर्ण करना भी अति आवश्यक तथा बड़ा कार्य होगा तथा प्राध्यापकों को वर्तमान सत्र में पढ़ रहे छात्र प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम तथा प्रैक्टिकल वर्क पूरा करवाने तथा परीक्षाएं आयोजित करने का कार्य भी संपन्न करवाना होगा।

विश्वविद्यालय स्तर पर भी ऑफलाइन शिक्षण ठप्प पड़ा है। विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं लगने से निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा। शिक्षण संस्थानों में पुस्तकालय बंद पड़े हैं। बहुत सा पठन-पाठन का कार्य तथा उच्चतर शिक्षा में शोध कार्य में व्यवधान पड़ा है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का बहुत अधिक नुकसान हो चुका है। पाठशाला से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को बैठने की आदत समाप्त हो गई है। शिक्षण संस्थान एक बार पुनः खोलने की अधिसूचना से नई उमंग, आशाओं तथा नई उम्मीदों का संचार हुआ है। सभी विद्यार्थी, अभिभावक, अध्यापक शिक्षण संस्थान खोलने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ ही दिनों में प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में चहल-पहल होगी। स्कूलों की घंटियां फिर से बजनी शुरू हो जाएंगी। आशा है कि भविष्य में पूर्व शिक्षा व्यवस्था पूर्ण रूप से सुदृढ़ होकर कार्यक्रम करना प्रारंभ करेगी। आवश्यकता है कि सभी सक्रिय, जागरूक, सचेत तथा संगठित होकर समाज निर्माण की दिशा में कार्य करें। अभी भी स्कूल बसों में यात्रा करते, संस्थानों में, कक्षाओं में तथा विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते ‘दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ बात पर अमल करना होगा ताकि किसी लापरवाही के कारण फिर से कोरोना वायरस रूपी दैत्य हमारे जीवन में प्रवेश न कर सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *