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पहली तिमाही में कोल इंडिया का पूंजीगत व्यय 65 प्रतिशत बढ़ा

नई दिल्ली, 11 जुलाई (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया ने सोमवार को कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 की जून तिमाही में उसका पूंजीगत व्यय 64.8 प्रतिशत बढ़कर 3,034 करोड़ रुपये हो गया जिसमें भूमि अधिग्रहण और कोयला क्षेत्रों में परिवहन ढांचे को मजबूत करने में हुए खर्च की अहम भूमिका रही।

पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में कोल इंडिया का पूंजीगत व्यय 1,841 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘नौंवीं तिमाही के लिए पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि को बनाए रखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में 65 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हासिल की।’’

पहली तिमाही के कुल पूंजीगत व्यय का लगभग पांचवां हिस्सा यानी 608 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण से संबंधित है। यह अप्रैल-जून 2021-22 के दौरान इस मद में खर्च किए गए 268 करोड़ रुपये का 2.3 गुना अधिक है। यह खर्च सीआईएल की सभी अनुषंगी कंपनियों से संबंधित है।

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पूंजीगत व्यय में वृद्धि ‘फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी’ (एफएमसी) परियोजनाओं के तहत हमारे कोयला क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में पर्याप्त खर्च की वजह से हुई है। ये दो महत्वपूर्ण क्षेत्र सीआईएल को त्वरित उत्पादन के लिए अपने खनन कार्यों का विस्तार करने और कोयले का निर्बाध परिवहन करने में मदद करते हैं।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘सीआईएल की उत्पादन रफ्तार वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक लगातार दो अंकों की वृद्धि को बनाए हुए है। इस गति को जारी रखने के सभी प्रयास जारी हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि निकासी का बुनियादी ढांचा भी इसी तरह का हो जो बढ़े हुए उत्पादन का परिवहन कर सके।’’

कोविड महामारी के दौरान भी सीआईएल का पूंजीगत व्यय तिमाही आधार पर लगातार बढ़ता रहा है। घरेलू कोयला उत्पादन में सीआईएल की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है।

 

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