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शाह बानो मामले में राजीव गांधी सरकार के मुखर विराधी रहे खान होंगे केरल के नए राज्यपाल

नई दिल्ली, 01 सितंबर (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा अमान्य घोषित करने के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले मुस्लिम नेता आरिफ मोहम्मद खान को मोदी सरकार ने केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। सरकार ने रविवार को खान के अलावा भाजपा के कई नेताओं को भी विभिन्न राज्यों के राज भवनों में भेजा है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भाजपा नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी (77) को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं भाजपा की तमिलनाडु अध्यक्ष तमिलसाई सुन्दरराजन (58) को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं हाल ही में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त किए गए पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र को राजस्थान भेजा गया है। मिश्र उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह की जगह लेंगे। सिंह का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पूर्व केन्द्रीय श्रम मंत्री बंडारु दतात्रेय (72) को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। कोश्यारी महाराष्ट्र के निवर्तमान राज्यपाल विद्या सागर राव की जगह लेंगे। जबकि सुन्दरराजन तेलंगाना में ईएसएल नरसिम्हन की उत्तराधिकारी होंगी। केरल में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम की जगह नए राज्यपाल बने खान (68) मुसलमानों में एक साथ तीन बार तलाक बोलकर पत्नी से संबंध खत्म करने की परंपरा के मुखर विरोधी हैं और लंबे समय से मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की वकालत कर रहे हैं। शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का शुरुआती दिनों में राजीव गांधी सरकार द्वारा समर्थन किए जाने पर 1985 में संसद में खान का भाषण बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, बाद में मुसलमान मौलवियों के तथा-कथित दबाव में आकर राजीव गांधी सरकार ने संसद में एक विधेयक पारित कर शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को अमान्य करार दिया। खान ने उसके तुरंत बाद मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उत्तर प्रदेश के खान बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे लेकिन 2007 तक वह राजनीति में सक्रिय नहीं रहे। हाल ही में मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक विधेयक लाये जाने पर खान ने उसका समर्थन किया। शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में तलाकशुदा मुसलमान महिलाओं को गुजारा भत्ता देने की बात कही थी।

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