बरगी बांध हादसे पर कुछ सवाल
-: ऐजेंसी/सक्षम भारत :-
मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में बरगी बांध में गुरुवार शाम हुए क्रूज नाव हादसे में एक सुखद सैर भयानक स्वप्न में बदल गई। इस दर्दनाक घटना में अब तक कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे के बाद की एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक महिला से उसका छोटा बच्चा चिपका हुआ है। लोग इस तस्वीर को देखकर ममता की व्याख्या कर रहे हैं कि मौत भी ममता पर भारी नहीं पड़ पाई। तस्वीर देखकर समझा जा सकता है कि मां ने अपने बच्चे को और खुद को बचाने के लिए आखिरी सांस तक कितना संघर्ष किया होगा। ऐसी कई दर्दनाक कहानियां इस हादसे के बाद कहने-सुनाने के लिए बच गई हैं। किसी परिवार में एक साथ तीन अर्थियां उठीं, तो किसी बेटी ने आंखों के सामने अपनी मां को बहते देखा। कोई परिवार दूसरे शहर से घूमने आया था, और अब लौटा ही नहीं। हादसे से ठीक पहले के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि तेज बहती हवाओं और ऊंची उठती लहरों का आनंद लोग ले रहे हैं, सेल्फी खींच रहे हैं, संगीत पर थिरक रहे हैं। फिर पल भर में सारा मंजर बदल गया। दार्शनिक अंदाज में भी इस घटना की व्याख्या हो रही है कि देखो जीवन क्षणभंगुर है, एक क्षण में हँसते-खेलते लोग मौत के मुंह में समा गए। लेकिन यहां सवाल उठना चाहिए कि क्या भूकंप या सुनामी जैसी कोई आपदा आई थी, जिस पर इंसान का कोई बस नहीं है, या इतने सारे लोग एक साथ अकाल मौत नहीं मरते अगर नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता।
ध्यान रहे कि गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे ये हादसा हुआ। जबकि मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि इलाके में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं। तो इसके बावजूद क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई। बताया जा रहा है कि क्रूज करीब 90 लोगों की क्षमता वाला था, लेकिन उस समय इसमें लगभग 40 यात्री सवार थे। लेकिन फिर भी यह दुर्घटना हुई, क्योंकि कई यात्री तेज हवाओं के बीच ऊपर वाले डेक पर चले गए, क्योंकि वहां खुली जगह थी। लेकिन इससे संतुलन बिगड़ गया। वजन ऊपर की तरफ बढ़ने से नाव एक तरफ झुकने लगी और लगातार हिलने लगी। घबराए हुए लोग एक तरफ से दूसरी तरफ भागने लगे, जिससे स्थिति और खराब हो गई। इसी कारण पानी नाव के निचले हिस्से में भरने लगा। जो लोग नीचे डेक पर थे या नीचे लौटे थे, वे वहीं फंस गए। यानी यह दुर्घटना टाली जा सकती थी, अगर क्रूज संचालकों ने पहले से सावधानी बरती होती। अगर एक साथ बहुत सारे लोगों को ऊपर नहीं जाने दिया जाता या जब निचले हिस्से में पानी भरने लगा, तब लोगों को नीचे लौटने से रोक कर फौरन बचाव के इंतजाम किए जाते तो शायद पर्यटकों को डूबने से बचाया जा सकता था।
एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि जब क्रूज पर पानी भरने लगा तो लाइफ जैकेट थैलों में से निकाले जा रहे थे। कायदे से क्रूज पर चढ़ते ही यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। अगर कोई यात्री मना करे तो उसे फौरन उतार दिया जाए। आखिर यह सख्ती उनकी अपनी जान की सुरक्षा के लिए है। लेकिन इसमें भी क्रूज संचालकों की लापरवाही दिखी कि उन्होंने आग लगने पर कुआं खोदने वाला काम किया, जब डूबने की नौबत आई तो लाइफ जैकेट बांटे गए, जिस कारण कई यात्री बच नहीं पाए। इसमें काफी हद तक भारतीय समाज का लापरवाह रवैया भी झलकता है, जो सावधानी के लिए उठाए गए कदमों की अवहेलना कर खुश होता है। चाहे दोपहिया वाहनों पर बैठने के दौरान हेलमेट पहनना हो या कार में बैठकर सीट बेल्ट लगाना हो, जब तक मजबूरी न हो अधिकतर लोग ऐसा नहीं करते हैं। हवाई यात्रा में भी कई बार विमान परिचारिका को टोकना पड़ता है कि कुर्सी की पेटी बांधे या मोबाइल फोन बंद करें, तब जाकर कुछ यात्री सुनते हैं। नियम तोड़ने के लिए ही बनते हैं, न जाने ऐसी धारणा समाज में क्यों फैलाई गई है जिसके कारण नियम का पालन करने वालों का अक्सर मजाक भी उड़ाया जाता है। जबकि कानून-नियम आखिर में लोगों के लाभ के लिए ही बनते हैं। लोगों को सैर-सपाटा, मनोरंजन सब विदेशों की तरह चाहिए, लेकिन वहां लोग नियम का पालन एकदम अनुशासन में करते हैं, यह बात भी भारतीय समाज को देखनी चाहिए।
बरगी बांध पर क्रूज पर बैठने वालों ने अगर पहले से लाइफ जैकेट मांगे होते तो शायद एक बड़ा हादसा टल सकता था। बहरहाल अब हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए क्रूज पायलट, एक सहायक और टिकट काउंटर प्रभारी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, सरकारी मैकाल रिसॉर्ट और बोट क्लब के मैनेजर को भी लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया और क्षेत्रीय प्रबंधक को मुख्यालय अटैच किया गया है। इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इसमें होमगार्ड और सिविल डिफेंस के डायरेक्टर जनरल, मध्य प्रदेश सरकार के सचिव और जबलपुर संभाग के कमिश्नर शामिल हैं। यह समिति हादसे के कारणों, नियमों के पालन और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जांच करेगी। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए पर्यटन विभाग क्रूज संचालन के लिए नए और सख्त नियम तैयार करेगा, ताकि यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
सवाल वही है कि क्या सख्त नियम तैयार करने के लिए सरकार किसी बड़ी दुर्घटना का ही इंतजार कर रही थी। वैसे चंद अधिकारियों पर सख्ती दिखाने के अलावा क्या सरकार अपनी जिम्मेदारी भी स्वीकार करेगी। क्योंकि मध्यप्रदेश में बीते कुछ समय में एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें निर्दोष मारे गए हैं। दूषित पानी पीने से मौत, जहरीली दवा से मौत, अस्पताल में नवजात की चूहों के कुतरने से मौत, बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा देना- ये सब प्रशासनिक अक्षमता और सरकार के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के कारण ही हुआ है। लेकिन छोटी-मोटी कार्रवाइयों के अलावा सरकार कुछ और नहीं करती।
बरगी बांध का हादसा ताजा-ताजा है, तो कुछ दिन तक इस पर चर्चा होती रहेगी, फिर सब कुछ भुला दिया जाएगा। और यह केवल मध्यप्रदेश का हाल नहीं है, पूरा देश इसी अंदाज में चल रहा है। बरगी बांध में क्रूज डूबा तो अब वाराणसी में सख्ती दिखाई जा रही है कि बिना लाइफ जैकेट के कोई क्रूज पर न चढ़े, इससे पहले यहां इस बात का ख्याल नहीं आया था। बहरहाल, आगे ऐसा कोई हादसा न हो और लोगों की खुशियां बनी रहें, इसका ख्याल सरकार रखे, यही उम्मीद की जा सकती है।
