इजरायल- ईरान युद्ध से वैश्विक आर्थिक महामंदी?
(लेखक-सनत जैन)
-: ऐजेंसी/सक्षम भारत :-
दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी के कारण संकट में
अमेरिका-इजराईल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण सारी दुनिया के देश आर्थिक महामंदी के शिकार होने जा रहे हैं। इस मंदी का बड़ा असर होने जा रहा है। जिसकी कल्पना कर पाना भी संभव नहीं है। एक माह से चल रहे, इस युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति वैश्विक स्तर पर प्रभावित हुई है। ईरान की हार्मोज में नाकाबंदी के बाद दुनिया के सभी देशों का संकट बढ़ता जा रहा है। महंगाई बढ़ रही है, ऊर्जा संकट का असर कारोबार और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ रहा है, जिसके कारण बेरोजगारी भी तेजी के साथ बढ़ रही है। कच्चे तेल और गैस के दाम लगातार बढ़ने से सभी देशों की अर्थ व्यवस्था गड़बड़ा रही है। इसका असर सरकारों के राजस्व पर भी देखने को मिल रहा है। आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। महंगाई के कारण आम लोग अपने जीवन की जरूरी चीजों को नहीं खरीद पा रहे हैं। भारत सरकार ने पहली बार अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। यह माना जा रहा है, भारत सरकार को अपने बजट को संशोधित करना पड़ेगा। युद्ध खत्म होने के स्थान पर और भी तेज होता जा रहा है। दुनिया भर के देशों में इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की सप्लाई घटकर मात्र 10 फ़ीसद रह गई है। जिसके कारण सारी व्यवस्था वैश्विक स्तर पर गड़बडा गई है। सारी दुनिया के देशों की आर्थिक स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो रही हैं। इसका असर शेयर बाजार और बैंकिंग व्यवस्था पर भी देखने को मिलने लगा है। शहरों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली संकट का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहु के सिर में जिस तरह से युद्ध का पागलपन सवार है, इसका असर सारी दुनिया के देशों पर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही टैरिफ-वार के माध्यम से सारी दुनिया के देशों में हड़कंप मचाया। जिसका असर महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ा। ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका में भी महंगाई और बेरोजगारी तेजी के साथ बढ़ी है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 3300 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो रहा है। करीब 90 लाख लोग सड़कों पर उतर आए हैं। अमेरिका की जनता ट्रंप से नाराज है। डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सांसद भी नाराज हैं। इसके बाद भी डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से युद्ध को भड़का रहे हैं, रोजाना तरह-तरह के बयान दे रहे हैं, उसके बाद सारी दुनिया में उन्हें एक साइको और पागल नेता के रूप में देख रही है। ट्रंप के अहंकार से स्थितियां और भी विकराल होती जा रही हैं। इस युद्ध में जिस तरह से अमेरिका के खिलाफ रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया सहित सैकड़ों देश अमेरिका के विरोध में खड़े हो गए हैं। उत्तर कोरिया ने अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल इंजन का सफल परीक्षण कर लिया है। सभी देशों में युद्ध का असर पड़ रहा है।
डॉलर मुद्रा को वैश्विक स्तर पर चुनौती मिल रही है। पिछले एक माह से सारी दुनिया के देशों में माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई देशों में खाद्य-संकट देखने को मिल रहा है। दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका इस समय अंतर्राष्ट्रीय और आंतरिक दृष्टि से सबसे कमजोर नजर आ रहा है। अमेरिका और इजराईल ने सैन्य उपकरणों और सैन्य व्यवस्था को लेकर, दुनिया के देशों के सामने जो हौआ खड़ा करके दादागिरी करते थे, ईरान युद्ध में उनका पर्दाफाश हो गया है। अमेरिका और इजराईल के महंगे सैन्य उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था को ईरान ने तबाह कर दिया है। ईरान ने उन सभी दावों को चुनौती देते हुए जिस तरह से इजराईल और अरब देशों के अमेरिकी सैन्य अड्डों को ध्वस्त किया है, उसके बाद अमेरिका और इजराईल की जो दादागिरी थी, वह एक तरह से खत्म होने के कगार पर खड़ी है। जो देश इस युद्ध में शामिल नहीं है, उन्हें भी कई मोर्चे में संघर्ष करना पड़ रहा है। उन देशों में भी महंगाई- बेरोजगारी के साथ आर्थिक संकट बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था का संकट वैश्विक स्तर पर जिस तरह से देखने को मिल रहा है, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है जल्द ही वैश्विक स्तर पर महामंदी फैलने का खतरा बन गया है। दुनिया के देशों में आर्थिक मंदी के कारण अर्थ व्यवस्था का वर्तमान स्वरूप पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो जाएगा। वैश्विक व्यापार संधि के बाद दुनिया के देशों में जिस तरह से विकास, बाजारवाद एवं कर्ज के माध्यम से आर्थिक विकास हुआ था, उसके कारण वर्तमान स्थिति में सभी देशों के ऊपर भारी कर्ज है। सभी देशों की अर्थ व्यवस्था में बड़ा दबाव है। रही-सही कसर इस युद्ध ने पूरी कर दी है। 1 माह में सभी दुनिया के देशों को ऊर्जा संकट और व्यापारिक गतिविधियों को जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई जल्द संभव नहीं होगी। युद्ध जल्दी ही बंद नहीं हुआ, तो इसके भीषण परिणामों की कल्पना नहीं की जा सकती है। इससे सारी दुनिया के देशों की चिंता बढ़ती चली जा रही है। सारी दुनिया के देशों में मंहगाई, बेरोजगारी और सामानों की उपलब्धता को लेकर अराजकता का माहौल बन रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है, सामाजिक विकास में आर्थिक व्यवस्था का सबसे बड़ा योगदान होता है। पिछले 30 वर्षों में जिस तरह से बाजारवाद का असर सारी दुनिया के देशों में हुआ है। कर्ज की अर्थव्यवस्था सारी दुनिया के देशों में फैली है। इसका बुरा असर जल्द ही सारी दुनिया को आर्थिक महामंदी के रूप में देखने को मिल सकता है।
