वेनेजुएला पर अमरीकी नियंत्रण के निहितार्थ
-विकेश कुमार बडोला-
-: ऐजेंसी/सक्षम भारत :-
भिन्न-भिन्न मानव प्रजातियों द्वारा अनेक गत कालखंडों से कब्जाए गए देशों के सार्वजनिक जीवन का चालन-परिचालन व संचालन अब इस समय भी तत्समय की मानव प्रजातियों द्वारा स्थापित दृष्टिकोण के साथ ही होता है। भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस देश पर अंतिम कब्जाधारी थे अंग्रेज। ये ब्रिटेन अर्थात इंग्लैंड से आए थे। इनके कब्जे के आरंभिक दिनों से लेकर अब तक भी यह देश इनके द्वारा निर्धारित जीवन पद्धतियों से मुक्त नहीं हो पाया है। इन्होंने इस देश के वासियों को जीवन को देखने का जो दृष्टिकोण थमाया, वो अब भी यथावत है। जो अंग्रेजी भाषा सिखाई वो अब भी अग्रणी भाषा है। राजनीति, अर्थनीति, समाजनीति, संचारनीति, परिवारनीति तथा समग्र जीवननीति किंचित वही है, जो अंग्रेज सिखा गए। समग्र नीतियां किसी न किसी स्तर पर वही हैं, जो इस देश को लूटने आए लुटेरे यहां के लोगों को सिखा-पढ़ा गए। इसी का दुष्परिणाम रहा, जो यहां के लोग कल्पना में हिंदू जीवन दर्शन तथा व्यवहार में तरह-बेतरह का आयातित अभारतीय जीवन दर्शन जीते रहे। इसी कारणवश यहां हर विचार, भाव, आचार, व्यवहार तथा सरोकार विरोधाभासों से भर गया। इस स्थिति में अभी भी परिवर्तन नहीं आया है। हमारे देश में आजकल इसी कोण से वेनेजुएला की घटना पर सामाजिक, जनसंचारिक तथा व्यक्तिगत मंथन हो रहा है। अमेरिका का तिरस्कार हो रहा है, किंतु अमेरिका का वीजा प्राप्त करने तथा वहां बसने की महत्त्वाकांक्षाओं का त्याग नहीं हो रहा।
ट्रंप को दोषारोपी के नए-नए विशेषणों से संबोधित किया जा रहा है, किंतु उसकी दृष्टि में अच्छा होने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। देश हो अथवा विदेश वास्तव में कौन किसके पक्ष में या विपक्ष में है, ज्ञात ही नहीं हो पाता। हर घटना के मूल में स्थापित समस्या तक किसी की भी दृष्टि नहीं पहुंच पाती। वेनेजुएला के राष्ट्रपति के बलात अपहरण की घटना, अपहरणकर्ता अमेरिकी राष्ट्रपति को साधारण विचारदृष्टि में अपराधी समझती है, किंतु अमेरिका में बढ़ती जोंबियों की संख्या को ध्यान में रख वेनेजुएला-प्रकरण पर विचार होगा, तो अमेरिका व ट्रंप दोनों उचित प्रतीत होंगे। जैसे भारत में मादक पदार्थों एवं चिट्टे के प्रसार से युवापीढ़ी का जीवन विनाश की ओर अग्रसर है, किंचित उसी भांति वेनेजुएला से अमेरिका पहुंचने व पहुंचाए जाने वाले मादक पदर्थों द्वारा अधिसंख्य अमेरिकी युवा जोंबी बन स्वयं का जीवन नष्ट कर रहे हैं। प्राय: देखा जाता है कि युवक अति मदिर चेतनशून्य हो परित्यक्त अमेरिकी गलियों में जैसे-तैसे पड़े रहते हैं। वे दिनों-महीनों तक ऐसे यूं ही पड़े होते हैं। उन्हें मादक पदार्थों से दूर करने के लिए अनेक प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। उनके लिए मादकता मुक्ति केंद्र बनाए जा रहे हैं। उनके पुनर्वास की योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। मादकता से मुक्ति हेतु संचालित इन सभी अमेरिकी व्यवस्थाओं पर विशाल धनराशि व्यय की जा रही है।
इतना होने-करने के उपरांत भी अमेरिका मादक पदार्थों के दंश से ग्रस्त है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को अमेरिकी डेल्टा फोर्स के सैनिकों ने 3 जनवरी 2026 को प्रात:काल में यूं ही बंदी नहीं बनाया। अमेरिका ने निकोलस मादुरौ को पकडऩे से पहले कई बार कठोर कार्रवाइयां कीं तथा चेतावनियां दी थीं। मार्च 2020 में अमेरिका ने आधिकारिक रूप में मादुरो पर ‘नार्को-टेररिज्म’ अर्थात मादक पदार्थ जनित आतंकवाद के आरोप लगाए थे। इसके लिए उन पर 15 मिलियन डॉलर का पुरस्कार रखा गया था, जिसे 2025 में 50 मिलियन कर दिया गया। अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने एक गुप्त निर्देश देते हुए चेतावनी दी थी कि कार्टेल्स के विरुद्ध सैन्य शक्ति का उपयोग किया जाए। इसके बाद सितंबर 2025 में वेनेजुएला के तट के पास तस्करी में उपयोग की जाती रहीं नावों पर अमेरिका ने हमले किए। इस प्रकार कई वर्षों के राजनयिक एवं आर्थिक प्रतिबंधों, जो संशोधनों के साथ 2017 से लगाए जा रहे थे, के बाद अंतत: जनवरी 2026 के आरंभ में ही अमेरिकी विशेष बलों ने एक गुप्त अभियान के माध्यम से मादुरो को अभिरक्षा में लेकर न्यूयार्क के संघीय न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां वे मादक पदार्थ जनित आतंकवाद एवं हथियारों के अवैध व्यापार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
न्यायालय में प्रस्तुत आरोप-पत्र में स्पष्ट है कि मार्च 2020 में अमेरिकी अनुमानों के अनुसार वेनेजुएला के माध्यम से वर्षभर में 200 से 250 मीट्रिक टन कोकीन की तस्करी की जाती थी। वर्ष 2024 में अमेरिका भेजी गई 24 प्रतिशत कोकीन के माध्यम से वेनेजुएला ने 8.2 बिलियन डॉलर की कुल आय अर्जित की। सीएनएन की 2019 की एक रिपोर्ट में स्पष्ट था कि वेनेजुएला से भेजी गई 240 टन कोकीन का मूल्य अमेरिका में लगभग 40 बिलियन डॉलर है। इन मादक पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों-लाखों अमेरिकी युवा जोंबीज बन चुके हैं। ट्रंप से पहले के शासकों ने युवा पीढ़ी के जोंबी बनने के विषय को सामाजिक विषय भले बनाया तथा जोंबी के जीवन की भयावहता को देख कई फिल्में भी अमेरिका में बनीं, किंतु युवाओं को जोंबीज बनने के मूल तंत्र पर प्रहार करने का साहस पहले किसी ने नहीं दिखाया। इससे आहत ट्रंप ने ‘मेजर ड्रग ट्रांजिट एंड इसिलिट ड्रग प्रोड्यूसिंग कंट्रीज’ अर्थात प्रमुख मादक पदार्थ या अवैध मादक पदार्थ उत्पादक देश की सूची बनाई, जो संयुक्त राष्ट्र की यूएनओडीसी पर ‘वल्र्ड ड्रग रिपोर्ट 2025’ से लगभग मिलान करती थी। इसके अनुसार दुनिया के सर्वाधिक संकटजनित मादक पदार्थ तस्कर एवं उत्पादक देशों में अफगानिस्तान, म्यांमार, कोलंबिया, पेरू एवं बोलीविया हैं।
और तस्करी के पदार्थों को लाने-ले जाने वाले प्रमुख देशों में मेक्सिको, भारत, चीन, पाकिस्तान व इक्वाडोर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सितंबर 2025 में निर्गत 2026 वित्तीय वर्ष की सूची में कुल 23 देशों को प्रमुख मादक पदार्थ आवागमन या उत्पादक केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया। इनमें मध्य अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र के देशों में से बहामास, बेलीज, कोस्टा रिका, डोमिनिक रिपब्लिक, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, निकारागुआ व पनामा तस्करी के केंद्र हैं। दक्षिण अमेरिका में वेनेजुएला व इक्वाडोर तथा एशिया में लाओस व थाईलैंड जैसे देश तस्करी में लिप्त हैं। जहां तक वेनेजुएला के प्राकृतिक तेल संसाधनों पर अमेरिकी गिद्ध दृष्टि का प्रश्न है, तो यह भी एक सत्य है, किंतु यदि मादुरो ने अमेरिका तक जाने वाले मादक पदार्थों पर प्रतिबंध हेतु कुछ गंभीर प्रयास किए होते तथा अमेरिकी सलाह पर मादक पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय तस्करों को दंडित करने की दिशा में कार्य किए होते, तो निश्चित था कि उनका पत्नी सहित अपहरण नहीं होता तथा उनके तेल संसाधन भी उनके नियंत्रण में होते। इस दिशा में वैश्विक मीडिया की रुचि नहीं है। वह अमेरिकन जोंबीज पर बनने वाली फिल्मों की तो खूब सुंदर समीक्षा प्रस्तुत करता है तथा जोंबीज के नरक बनते जीवन पर भी चिंताभाव प्रकट करता है, किंतु युवाओं को जोंबीज बनने पे विवश करने वाले मादक पदार्थों के कारोबारियों-तस्करों पर अमेरिकी कार्रवाई की सराहना नहीं करता। इसके विपरीत वह अमेरिकी कार्रवाई को वेनेजुएला के तेल भंडारों पर अवैध नियंत्रण की योजना कहकर प्रचारित करता है।
