उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर की याचिका पर फैसला करेगा उच्च न्यायालय
नई दिल्ली, 19 जनवरी (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। दिल्ली उच्च न्यायालय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका पर सोमवार को फैसला सुनाएगा, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया है। उच्च न्यायालय की ओर से दी गई सूचना के अनुसार, न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा अपराह्न ढाई बजे फैसला सुनाएंगे।
पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में अधीनस्थ अदालत ने 13 मार्च 2020 को सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अधीनस्थ अदालत ने कहा था कि परिवार के “एकमात्र कमाने वाले सदस्य” की हत्या के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत में बर्बरता के कारण नौ अप्रैल 2018 को उनकी मृत्यु हो गई थी। सेंगर ने 2017 में नाबालिग का अपहरण कर उससे दुष्कर्म किया था।
अधीनस्थ अदालत ने यह मानते हुए कि हत्या का इरादा नहीं था, सेंगर को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया, लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषियों को गैर-इरादतन हत्या के लिए अधिकतम सजा सुनाई।
दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के फैसले के खिलाफ, साथ ही पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर की अपील उच्च न्यायालय में लंबित हैं।
उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को दुष्कर्म मामले में सेंगर की सजा को, दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन पर रोक लगा दी थी।
