ग्रामीण आजीविका को गति देंगी इलेक्ट्रिक साइकिलें, राष्ट्रीय कार्यशाला में माइक्रोमोबिलिटी पर मंथन
नई दिल्ली, 17 मार्च (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को मजबूत बनाने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिलों के उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) की सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के सहयोग से आयोजित किया।
कार्यशाला का विषय इलेक्ट्रिक साइकिलें ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाती हैं रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि किफायती, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों, उद्योग और विकास भागीदारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी समाधानों को बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
इस अवसर पर सामाजिक और परिवर्तनकारी ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण (एसटीआरईई) प्रभाव आकलन रिपोर्ट भी जारी की गई। साथ ही पायलट राज्यों की स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी को बढ़ावा देने में योगदान के लिए ऊर्जा चैंपियन के रूप में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक साइकिलें ग्रामीण उद्यमियों के लिए सतत और पर्यावरण अनुकूल परिवहन का प्रभावी विकल्प बन सकती हैं। बेहतर परिवहन से खासकर स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं से जुड़ी महिलाओं की आजीविका को नई मजबूती मिलेगी।
कार्यशाला में अपनी इलेक्ट्रिक साइकिल को जानें शीर्षक से लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें कार्गो इलेक्ट्रिक साइकिलों और उनके आजीविका से जुड़े उपयोगों को दिखाया गया।
यह पहल बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में लागू पायलट परियोजना के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें पाया गया कि इलेक्ट्रिक कार्गो साइकिलें महिलाओं के श्रम को कम करने, बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और आय के नए अवसर पैदा करने में सहायक साबित हो सकती हैं।
कार्यशाला में तीन पैनल चर्चाओं के जरिए इलेक्ट्रिक साइकिल इकोसिस्टम के विस्तार, नीतिगत समन्वय और ग्रामीण आजीविका व जलवायु कार्रवाई में इसकी भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग प्रतिनिधियों, अनुसंधान संस्थानों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने भाग लिया।
