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डिजिटल इंडिया की बड़ी छलांग: आरबीआई का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स पहली बार 500 के पार, यूपीआई के दम पर दुनिया में नंबर वन बना भारत का भुगतान तंत्र

मुंबई, 13 फरवरी (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। भारत में कैशलेस इकोनॉमी की रफ्तार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (DPI) पहली बार 500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 516.76 (सितंबर 2025 तक) पर पहुँच गया है। मार्च 2018 को आधार वर्ष (100 अंक) मानकर शुरू किए गए इस सूचकांक में आई यह जबरदस्त वृद्धि देश के कोने-कोने में डिजिटल भुगतान की गहरी पैठ को दर्शाती है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, बुनियादी ढांचे में सुधार और उपभोक्ता के बढ़ते भरोसे ने इस सूचकांक को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई है।

डिजिटल भुगतान के इस महाकुंभ में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सबसे बड़े गेमचेंजर के रूप में उभरा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में यूपीआई को दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा त्वरित भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है। वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो रियल-टाइम भुगतान प्रणाली में भारत 49 प्रतिशत हिस्सेदारी और 129.3 बिलियन लेनदेन के साथ शीर्ष पर काबिज है। इस रेस में भारत ने ब्राजील (14%), थाईलैंड (8%) और चीन (6%) जैसे बड़े देशों को कोसों पीछे छोड़ दिया है, जो भारत की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण है।

आरबीआई-डीपीआई की यह गणना पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित है, जिनमें ‘भुगतान प्रदर्शन’ का भार सबसे अधिक 45 प्रतिशत है। इसके अलावा आपूर्ति और मांग पक्ष की अवसंरचना (10-10%), भुगतान सुगम बनाने वाले कारक (25%) और उपभोक्ता केंद्रितता (5%) को भी शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से 2019 में 153.47 पर रहने वाला यह इंडेक्स आज 500 के पार गया है, वह भारत के ‘डिजिटल सशक्तिकरण’ की असली तस्वीर है। अब सरकार का अगला लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है ताकि वित्तीय समावेशन को और गति मिल सके।

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