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डीआरडीओ जल्द करेगा सुदर्शन चक्र का निर्माण: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 02 जनवरी (ऐजेंसी/सक्षम भारत)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर सबसे पहले पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को दिए गए भारत के मुंहतोड़ जवाब यानी ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया और कहा कि देश के इस सैन्य अभियान के दौरान संगठन द्वारा विकसित किए गए हथियारों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। जो हमारे राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति डीआरडीओ की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस-2025 के मौके पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित सुदर्शन चक्र को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि डीआरडीओ जल्द ही इसका निर्माण कर लेगा। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान के जरिए यह जानकारी दी है। यहां बता दें कि सुदर्शन चक्र पहल के तहत संगठन अगले दस वर्षों में पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने के लिए जिम्मेदार है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने आधुनिक युग में वायु रक्षा के महत्व को देखा था।

नवाचार संग निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाएं
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से निरंतर नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने वाले अधिक क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि संगठन को तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकीय इकोसिस्टम के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ते रहने और बदलते वक्त के हिसाब से उत्पाद लाते रहने का अनुरोध भी किया। गहन प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की दिशा में जारी प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होगी। बल्कि रक्षा इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।

वहीं डीआरडीओ सचिव और अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को वर्तमान में जारी अनुसंधान, विकास गतिविधियों, 2025 की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत को बढ़ावा देने वाली विभिन्न पहलों के साथ ही 2026 के रोडमैप के बारे में जानकारी दी है। जिसमें तय किए गए प्रमुख लक्ष्यों, संगठन की बेहतरी के लिए किए जा रहे तमाम सुधारों से उन्हें अवगत कराया गया। इस बातचीत के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, महानिदेशक, कॉर्पोरेट निदेशक और अन्य वरिष्ठ डीआरडीओ वैज्ञानिक, अधिकारी मौजूद थे।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज का युग केवल विज्ञान का नहीं है। बल्कि इसमें लगातार विकास और सीखने की आवश्यकता है। बदलती हुई इस दुनिया में प्रौद्योगिकी स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब महज शब्द नहीं हैं। दुनिया के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा नए युद्ध क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जिसे कल का ज्ञान अप्रचलित हो रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि हमें कभी ये नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। बल्कि हमें निरंतर सीखते रहना चाहिए और खुद को चुनौती देते रहने चाहिए। जिससे नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके।

 

 

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